आज़म ख़ान को हाईकोर्ट से ज़मानत, लेकिन अब भी रिहाई पर सस्पेंस

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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से क्वालिटी बार ज़मीन मामले में ज़मानत मिल गई है। अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। जानें पूरी अपडेट और मामला किस तरह बदलता रहा है।

लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान को गुरुवार को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने जहाँ क्वालिटी बार ज़मीन मामले में उन्हें ज़मानत दे दी, वहीं रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने रिकॉर्ड रूम के अभिलेखों में हेरफेर और साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर दाखिल एडिशनल चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए उन्हें 20 सितंबर को तलब कर लिया है।

क्वालिटी बार मामले में मिली ज़मानत

जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने आज़म ख़ान को क्वालिटी बार ज़मीन प्रकरण में ज़मानत दी। यह मामला वर्ष 2019 में राजस्व विभाग की शिकायत पर सिविल लाइंस थाने में दर्ज हुआ था। बाद में 2024 में इस केस में आज़म ख़ान का नाम जोड़ा गया था।
उनके वकील इमरानउल्ला ने कहा कि आज़म ख़ान को लगभग सभी मामलों में ज़मानत मिल चुकी है और अब उनकी जेल से रिहाई का रास्ता खुलने वाला था। ज़मानत की खबर से समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद स्थानीय अदालत ने नई कार्यवाही शुरू कर दी।

एमपी-एमएलए कोर्ट से नया झटका

रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने गुरुवार को रिकॉर्ड रूम अभिलेखों से छेड़छाड़ और साक्ष्य मिटाने के मामले में दाखिल एडिशनल चार्जशीट पर सुनवाई की। अदालत ने आईपीसी की धारा 467, 471 और 201 का संज्ञान लेते हुए आज़म ख़ान को 20 सितंबर को पेश होने का आदेश दिया।
कानूनी जानकारों का कहना है कि इन धाराओं में अलग से ज़मानत करानी होगी, तभी रिहाई संभव है।

विवादित मामलों की पृष्ठभूमि

बीते साल शत्रु संपत्ति के मामले में रामपुर पुलिस ने आज़म ख़ान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म को क्लीन चिट दी थी। लेकिन शासन ने इस मामले की दोबारा विवेचना कराई और जांच अपराध शाखा के इंस्पेक्टर नवाब सिंह को सौंपी गई। जांच में आज़म ख़ान की संलिप्तता पाए जाने के बाद आईपीसी की धारा 467, 471 और 201 में अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल की गई थी।
इस पर बचाव पक्ष ने आपत्ति जताते हुए कोर्ट से संज्ञान न लेने की अपील की थी। जबकि अभियोजन पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई को सही करार दिया। दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने गुरुवार को अपना आदेश सुनाया और अतिरिक्त धाराओं का संज्ञान लिया।

राजनीतिक और कानूनी असर

क्वालिटी बार प्रकरण में हाईकोर्ट से ज़मानत मिलने के बाद माना जा रहा था कि आज़म ख़ान की जेल से रिहाई का रास्ता साफ होगा। लेकिन एमपी-एमएलए कोर्ट के ताज़ा आदेश ने उनकी रिहाई पर फिर से प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब उन्हें इन नई धाराओं में ज़मानत मिलना बाकी है, तभी वे जेल से बाहर आ पाएंगे।

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