नई दिल्ली: पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली ने लोकसभा में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा राहुल गांधी पर की गई हालिया टिप्पणियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। दानिश अली ने कहा कि निशिकांत दुबे का यह व्यवहार उनके लिए ‘आश्चर्यजनक’ नहीं है, बल्कि यह उस अपमानजनक अनुभव की याद दिलाता है जो उन्होंने खुद 2023 में सदन के भीतर झेला था।
नीति पर उकसावे का साया
दानिश अली ने अपने लेख में कहा कि एक बार फिर सदन में नीतिगत मुद्दों पर चर्चा के बजाय भाषा को हथियार बनाया गया और मंच व्यक्तिगत टकराव में बदल गया। उन्होंने निशिकांत दुबे को एक ‘आदतन अपराधी’ करार देते हुए आरोप लगाया कि उनका उपयोग विपक्ष के खिलाफ व्यक्तिगत हमले और दुष्प्रचार अभियान चलाने के लिए किया जाता है। उनके अनुसार, यह टकरावपूर्ण रणनीति आकस्मिक नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है।
2023 की घटना का जिक्र
लेख में दानिश अली ने 2023 की उस घटना का विस्तार से उल्लेख किया, जब भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने सदन के भीतर उनके खिलाफ अपमानजनक और सांप्रदायिक अपशब्दों का प्रयोग किया था। उन्होंने कहा, “मैं वहां एक निर्वाचित सांसद के रूप में खड़ा था और सबके सामने मुझ पर गालियां बरसाई जा रही थीं।” उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही उन शब्दों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया, लेकिन उससे एक प्रतिनिधि की गरिमा बहाल नहीं होती।
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कुँवर दानिश अली का योगी सरकार पर तीखा प्रहार
कार्रवाई न होने पर जताई निराशा
पूर्व सांसद ने इस बात पर गहरा दुख जताया कि स्पीकर को विशेषाधिकार नोटिस देने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने के बावजूद, संबंधित सदस्य के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि शीर्ष स्तर से मिलने वाला यही ‘मौन समर्थन’ ऐसी हरकतों को बार-बार दोहराने के लिए बढ़ावा देता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरता मानक
दानिश अली के अनुसार, इस तरह की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संसद में बहस के मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब सत्ता पक्ष के सांसद ही सबसे बड़े व्यवधान उत्पन्न करने वाले बन जाते हैं, तो यह संसदीय संस्थागत गरिमा के लिए एक गंभीर खतरा है।
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