जगदलपुर | 7 फरवरी, 2026 (डॉ एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती): भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में जनजातीय संस्कृति के महाकुंभ ‘बस्तर पंडुम 2026’ का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बस्तर की समृद्ध विरासत की सराहना की और माओवाद के खात्मे के बाद क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक बदलावों पर जोर दिया।
“बस्तर का जीवन दर्शन पूरे देश के लिए सीख”
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की धरती नायकों और प्राकृतिक सुंदरता की भूमि है। उन्होंने कहा, “बस्तर के लोग जीवन को उत्सव (पंडुम) के रूप में जीते हैं। चाहे बीज बोना हो या आम का मौसम, यहाँ की हर परंपरा प्रकृति से जुड़ी है। जीवन जीने का यह तरीका पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है।” इस वर्ष के महोत्सव में 50,000 से अधिक लोग जनजातीय कला और जीवन शैली का प्रदर्शन कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संस्कृति संरक्षण के इन प्रयासों की सराहना की।
माओवाद पर निर्णायक प्रहार और ‘नियद नेल्लानार योजना’
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में माओवाद के प्रभाव में आई कमी और शांति की वापसी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दशकों के संघर्ष के बाद अब बस्तर में भय और अविश्वास का वातावरण समाप्त हो रहा है।
- मुख्यधारा में वापसी: हिंसा छोड़ चुके लोगों की सराहना करते हुए उन्होंने उन्हें लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखने का आह्वान किया।
- विकास की नई किरण: उन्होंने राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार योजना’ (आपका अच्छा गांव) का जिक्र करते हुए कहा कि आज गांव-गांव में बिजली, सड़क और पानी पहुँच रहा है। जो स्कूल वर्षों से बंद थे, वे अब दोबारा खुल रहे हैं।
पर्यटन और ‘होम स्टे’ (Home Stay) की संभावनाएं
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि यहाँ के जलप्रपात, गुफाएं और प्राचीन संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा Home Stay को बढ़ावा देने के कदमों की प्रशंसा की, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
शिक्षा और पद्म पुरस्कार विजेताओं का सम्मान
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए शिक्षा को आधारशिला बताया और एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2026 के पद्म पुरस्कार विजेताओं— डॉ. बुधरी ताती, डॉ. रामचन्द्र गोडबोले और सुनीता गोडबोले का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने सुदूर क्षेत्रों में मुफ्त चिकित्सा और समाज सेवा की मिसाल पेश की है।
“यह लोकतंत्र की ही ताकत है कि ओडिशा के एक छोटे से गांव की बेटी आज भारत की राष्ट्रपति के रूप में आपके सामने खड़ी है।” – श्रीमती द्रौपदी मुर्मु
निष्कर्ष: विरासत और आधुनिकता का संगम
संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने युवाओं से अपील की कि वे अपनी जड़ों और विरासत को संजोते हुए आधुनिक विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। उन्होंने ‘पीएम जनमन’ और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ जैसी योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया ताकि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा किया जा सके।
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से होगा ‘आतंकिस्तान’ का अंत: पहलगाम हमले की बरसी पर गरजे इंद्रेश कुमार

- लोकसभा में महिला आरक्षण (131वां संशोधन) विधेयक गिरा; दो-तिहाई बहुमत जुटाने में विफल रही सरकार

- अंडमान में जमीयत उलेमा-ए-हिंद का तीन दिवसीय केंद्रीय मंथन शुरू; युवाओं के प्रशिक्षण और ‘आदर्श मस्जिद’ प्रोजेक्ट पर ज़ोर

- आशा भोसले का निधन: 92 वर्ष की उम्र में दिग्गज गायिका ने ली अंतिम सांस, सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

- प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत: सभी राज्यों में 5 किलो LPG सिलेंडर की सप्लाई दोगुनी

