बदायूं: उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ़ संपत्तियों के बड़ी संख्या में रिजेक्ट होने से प्रदेशभर में चिंता बढ़ गई है, और इसी बीच समाजसेवी फखरे अहमद शोबी ने लोगों को घबराने के बजाय सुधारात्मक कार्रवाई करने की अपील की है।
पोर्टल पर बढ़ी मुश्किल
वक़्फ़ संशोधन अधिनियम 2025 के तहत मस्जिद, मदरसा, कब्रिस्तान, दरगाह और ईदगाह जैसी वक़्फ़ संपत्तियों का विवरण उम्मीद पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।
ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 12,000 से अधिक संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन गलत विवरण, अधूरे दस्तावेज़ और तकनीकी त्रुटियों के कारण खारिज किए गए हैं।
रिजेक्शन के कारण
रिपोर्ट में मुख्य वजहें डेटा एंट्री में गलतियां, गलत खसरा नंबर, दस्तावेज़ों का अधूरा होना और एक ही वक़्फ़ नंबर के तहत कई संपत्तियों का पंजीकरण बताई गई हैं।
लखनऊ, बिजनौर और सहारनपुर जैसे जिलों में सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं।
फखरे अहमद शोबी की अपील
फखरे अहमद शोबी ने मुतवल्लियों और स्थानीय लोगों से कहा है कि रिजेक्शन का मतलब संपत्ति का वक़्फ़ दर्जा खत्म होना नहीं है, बल्कि यह एक प्रक्रियात्मक कमी है जिसे सुधारा जा सकता है।
उन्होंने लोगों से अपने लॉगिन आईडी के जरिए स्टेटस चेक करने और 5 जून 2026 की समय-सीमा से पहले गलतियां ठीक कर दोबारा आवेदन करने की सलाह दी है।
प्रशासन से मांग
शोबी ने प्रशासन और वक़्फ़ बोर्ड से प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की है, ताकि तकनीकी जानकारी कम रखने वाले लोग भी आसानी से अपनी संपत्तियों का विवरण दर्ज करा सकें।
बदायूं में भी पहले से उम्मीद पोर्टल पर वक़्फ़ संपत्तियों के अपलोड और सहयोग के लिए व्यवस्था की जा चुकी है।livehindustan+1
जरूरी जानकारी
- सुधार और पुनः पंजीकरण की अंतिम तिथि: 5 जून 2026.
- मुतवल्ली को लॉगिन आईडी से रिजेक्शन का कारण देखकर दस्तावेज़ दोबारा अपलोड करने होंगे।
- यूपी में सबसे ज्यादा रिजेक्शन लखनऊ, बिजनौर और सहारनपुर में दर्ज हुए हैं।
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