त्रिवेणी कला संगम में ‘गीतों की माला’ ने रचा जादू, सुरों ने जगा दी बीते दौर की यादें

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नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2025: दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम की शुक्रवार शाम एक सुरमयी याद बन गई, जब “थ्री आर्ट्स क्लब” और “कात्यायनी” के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ विशेष संगीतमय कार्यक्रम, “गीतों की माला – ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना।”

भावनाओं और सुरों के इस अनोखे संगम का लेखन और प्रस्तुति निधिकान्त पाण्डेय ने की, जबकि गायक देवानंद झा ने अपनी मधुर आवाज़ से श्रोताओं को 40 के दशक से 80 के दशक तक के स्वर्ण युग में पहुँचा दिया। के.एल. सहगल से लेकर किशोर कुमार, मोहम्मद रफ़ी से लेकर जगजीत सिंह तक… देवानंद झा ने एक-एक गीत में पुरानी यादों की महक घोल दी।

हर गीत पर दर्शकों की तालियों की गूंज से सभागार गूँजता रहा। समय की कमी के बावजूद दर्शक कार्यक्रम को लंबा होते देखना चाहते थे, और अंत में “ज़िंदगी एक सफ़र है सुहाना” की प्रस्तुति पर पूरा हॉल झूम उठा। उत्साह इतना था कि दर्शकों के आग्रह पर देवानंद झा को एक गीत दोबारा गाना पड़ा।

Giton ki Mala 1

इस यादगार शाम का निर्माण अनुराधा दर और सोहेला कपूर ने किया। कार्यक्रम की लोकप्रियता का आलम यह रहा कि त्रिवेणी कला थिएटर पूरी तरह भर गया। कई श्रोता ज़मीन पर बैठकर भी सुरों का आनंद लेते रहे। दर्शकों के स्नेह से अभिभूत निधिकान्त पाण्डेय ने उपस्थित जनसमूह के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

Giton ki Mala 2

भीड़ के चलते कुछ श्रोता अंदर प्रवेश नहीं कर सके, जिसके लिए आयोजकों ने खेद जताया। हालांकि, बाहर रह गए दर्शकों ने भी आग्रह किया कि ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएँ।

“गीतों की माला” ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब सुर और शब्द मिलते हैं, तो ज़िंदगी सचमुच एक सुहाना सफ़र बन जाती है।

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