जामिया के प्रोफेसर को CCRUM से 22.94 लाख रुपये का अनुदान, मल्टीड्रग-प्रतिरोधी यूरोपैथोजेन्स पर होगा शोध

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नई दिल्ली, 2 अप्रैल 2026: जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के जीवन विज्ञान संकाय के बायोसाइंसेज विभाग के प्रोफेसर काज़ी मोहम्मद रिज़वानुल हक को केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (CCRUM) की ओर से 22.94 लाख रुपये का शोध अनुदान मिला है। यह अनुदान ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) योजना 2025-26 के तहत दिया गया है।

यह शोध परियोजना “स्क्रीनिंग ऑफ यूनानी मेडिसिनल प्लांट्स/फॉर्म्युलेशन्स फॉर एंटीमाइक्रोबियल पोटेंशियल अगेंस्ट मल्टीड्रग रेज़िस्टेंट यूरोपथोजेनिक बैक्टीरिया यूज़िंग AI/ML असिस्टेड इन-सिलिको एंड एक्सपेरिमेंटल एप्रोचेज़” विषय पर आधारित है। प्रोफेसर हक इस परियोजना के समन्वयक और प्रधान अन्वेषक हैं, जबकि जामिया हमदर्द, नई दिल्ली के यूनानी चिकित्सा उत्कृष्टता केंद्र के प्रोफेसर व निदेशक डॉ. सईद अहमद सह-अन्वेषक होंगे।

शोध का उद्देश्य

इस अध्ययन में मल्टीड्रग-प्रतिरोधी यूरोपैथोजेनिक बैक्टीरिया के खिलाफ यूनानी औषधीय पौधों और फॉर्म्युलेशनों की रोगाणुरोधी क्षमता की जांच की जाएगी। इसमें AI और मशीन लर्निंग आधारित इन-सिलिको विश्लेषण के साथ प्रयोगात्मक शोध को जोड़ा जाएगा, ताकि संभावित नए पौधों-आधारित एंटीमाइक्रोबियल एजेंटों की पहचान की जा सके।

संक्रामक रोग दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल हैं, जबकि एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी रोगजनकों के कारण इलाज और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) भी ऐसे संक्रमणों में शामिल है, जहां दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया बड़ी समस्या बन चुके हैं।

राष्ट्रीय महत्व

यह परियोजना एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस से निपटने और पारंपरिक यूनानी चिकित्सा को वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ाने की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इससे दवा-प्रतिरोधी संक्रमणों के लिए नए, सुरक्षित और प्रभावी उपचार विकल्प विकसित होने की संभावना जताई जा रही है।

प्रोफेसर हक का शोध कार्य

प्रोफेसर हक हाल ही में भारत-ब्रिटेन संयुक्त सहयोगी परियोजना ‘SELECTAR: Selection for antimicrobial resistance by antimicrobial production waste’ पूरी कर चुके हैं। यह परियोजना DBT-भारत और NERC-ब्रिटेन द्वारा वित्तपोषित थी, जिसमें बर्मिंघम विश्वविद्यालय, लीड्स विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय, CSIR-केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान और IIT दिल्ली के विशेषज्ञ शामिल थे।

वह एक अन्य चल रही DBT-वित्तपोषित प्रमुख परियोजना के समन्वयक और प्रधान अन्वेषक भी हैं, जो TERI, नई दिल्ली और राज्य वन अनुसंधान संस्थान, मध्य प्रदेश के सहयोग से संचालित हो रही है। इस परियोजना में जामिया की प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. मरियम सरदार सह-प्रधान अन्वेषक हैं।

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