मेट्रो पार्किंग की सुरक्षा दांव पर: जसोला शाहीन बाग स्टेशन से स्कॉर्पियो चोरी, प्रबंधन की लापरवाही आई सामने

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नई दिल्ली: देश की राजधानी में सुरक्षित मानी जाने वाली ‘मेट्रो पार्किंग’ अब चोरों के निशाने पर है। ताज़ा मामला जसोला शाहीन बाग मेट्रो स्टेशन की आधिकारिक पार्किंग का है, जहाँ से एक महिंद्रा स्कॉर्पियो (Scorpio) चोरी होने की घटना ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। इस घटना के बाद से वाहन स्वामियों में भारी रोष है और पार्किंग प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या है पूरी घटना?

पीड़ित वाहन स्वामी, जो पिछले ढाई साल से इसी पार्किंग का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्होंने बताया कि रोज़ाना की तरह उन्होंने अपनी कार रात करीब 12:30 बजे पार्किंग में खड़ी की थी। इसके लिए वे हर महीने ₹3,000 का शुल्क भी देते हैं।

अगली सुबह करीब 11:00 बजे जब वे अपनी गाड़ी लेने पहुंचे, तो पार्किंग स्थल से गाड़ी नदारद थी। चौंकाने वाली बात यह रही कि पार्किंग स्टाफ को खुद नहीं पता था कि गाड़ी कहाँ है। पीड़ित के अनुसार, काफी देर तक स्टाफ के लोग इधर-उधर गाड़ी ढूंढने का नाटक करते रहे, जिससे प्रबंधन की भारी लापरवाही उजागर हुई।

पार्किंग या ‘चोरों का अड्डा’? लगे गंभीर आरोप

स्थानीय निवासियों और पीड़ित ने पार्किंग चलाने वाली एजेंसी पर कई संगीन आरोप लगाए हैं:

  • क्षमता से खिलवाड़: आरोप है कि इस पार्किंग की क्षमता करीब 150 वाहनों की है, लेकिन अधिक मुनाफे के चक्कर में यहाँ 250 से ज्यादा गाड़ियां ठूंस दी जाती हैं।
  • सड़क पर लावारिस छोड़ी जाती हैं गाड़ियां: पीड़ित का कहना है कि उन्होंने गाड़ी अंदर पार्क की थी, लेकिन स्टाफ ने जगह बनाने के लिए रात में उनकी स्कॉर्पियो को बिना बताए मुख्य सड़क पर खड़ा कर दिया, जहाँ से चोर उसे आसानी से ले उड़े।
  • मालिकों का पता नहीं: घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी पार्किंग के मुख्य ठेकेदार या मालिक ने पीड़ित से संपर्क नहीं किया है। यहाँ तक कि वहां मौजूद स्टाफ के पास अपने मालिकों का सही मोबाइल नंबर तक उपलब्ध नहीं है।

स्टाफ की सफाई: “जल्दी निकालने के चक्कर में बाहर लगाई गाड़ी”

पार्किंग कर्मचारी दानिश ने स्वीकार किया कि गाड़ी बाहर से चोरी हुई है। हालांकि, उन्होंने बचाव करते हुए तर्क दिया कि कई बार ग्राहक खुद जल्दी निकलने के लिए गाड़ी बाहर लगाने को कहते हैं। लेकिन जब उनसे जिम्मेदारी पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने माना कि गाड़ी चाहे अंदर हो या बाहर, उसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी पार्किंग प्रबंधन की ही होती है। स्टाफ का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दी गई है।

पीड़ित की मांग: “नुकसान की भरपाई करे प्रबंधन”

वाहन स्वामी ने दो टूक कहा है कि इंश्योरेंस कंपनी से मिलने वाली आईडीवी (IDV) वैल्यू और गाड़ी की असल कीमत के बीच जो बड़ा अंतर है, उसकी भरपाई पार्किंग प्रबंधन को करनी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि:

  1. पार्किंग स्थल पर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के नाम व मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से लिखे जाएं।
  2. सुरक्षा मानकों की दोबारा समीक्षा हो ताकि भविष्य में ऐसी घटना न हो।

“अगर मेट्रो जैसी सुरक्षित जगह से भी गाड़ियां चोरी होंगी, तो आम आदमी अपनी संपत्ति के लिए कहाँ जाए? हम यहाँ सुरक्षा के लिए पैसे देते हैं, सिर्फ जगह के लिए नहीं।” — एक परेशान वाहन स्वामी

वर्तमान स्थिति

पुलिस ने इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और जांच जारी है। हालांकि, पार्किंग प्रबंधन की उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने मेट्रो से सफर करने वाले और पार्किंग का उपयोग करने वाले हज़ारों लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है।

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