ज्वाला गुट्टा ने दिया 30 लीटर ‘लिक्विड गोल्ड’, बचाई हजारों नवजातों की जान

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भारत में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ रही है और यह कदम नवजात शिशुओं के जीवन रक्षक के रूप में उभर रहा है। हाल ही में भारत की चर्चित बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने अपनी दूसरी संतान के जन्म के बाद लगभग 30 लीटर मां का दूध एक सरकारी अस्पताल के मिल्क बैंक में दान किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस पहल को साझा करते हुए कहा कि “मां के दूध से जीवन बचता है। प्रीमेच्योर और बीमार बच्चों के लिए डोनर मिल्क जीवनरक्षक हो सकता है। जो महिलाएं डोनेट कर सकती हैं, वे जरूरतमंद परिवारों की हीरो बन सकती हैं।” उनका यह कदम महिलाओं में दूध दान करने की प्रेरणा बढ़ा रहा है और मिल्क बैंक की सहायता को प्रोत्साहित कर रहा है।​

ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने की प्रक्रिया और नियम

स्वस्थ स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिनका शरीर स्वस्थ हो और वे खून की जांच (HIV, हेपेटाइटिस, सिफलिस आदि) पूरी कर लें, वे दूध दान कर सकती हैं। इसमें शराब, तंबाकू, अवैध ड्रग्स का सेवन न होना जरूरी है। दूध को एक्सप्रेस कर कैप्चर किया जाता है, फिर उसे पास्चुराइज कर टेस्टिंग के बाद अस्पताल के ह्यूमन मिल्क बैंक में रखा जाता है। यह दूध खासतौर पर उन नवजातों को दिया जाता है जो समय से पहले जन्मे हों, बीमार हों या जिनकी मां दूध नहीं दे पा रही हो।​

ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन का महत्व

भारत में हर साल करोड़ों बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से कई का वजन कम होता है या वे बीमार पैदा होते हैं। ऐसे समय में मां का दूध नवजातों के विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए बेहद जरूरी होता है। इसे ‘लिक्विड गोल्ड’ कहा जाता है क्योंकि इसमें सभी जरूरी पोषक तत्व, एंटीबॉडीज और एंजाइम होते हैं। भारत में लगभग 90 से अधिक मिल्क बैंक काम कर रहे हैं, लेकिन मांग के मुकाबले सप्लाई कम होती है। ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन जितना जरूरी है, उतना ही यह माताओं के लिए भी भावनात्मक रूप से संतोषजनक अनुभव है और पोस्टपार्टम रिकवरी में मदद करता है।​

ज्वाला गुट्टा की पहल

ज्वाला गुट्टा ने अप्रैल 2025 में अपनी बेटी मीरा को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि उनके पास अपनी बेटी की जरूरत से ज्यादा दूध है, जो उन्होंने जरूरतमंद नवजातों के लिए दान किया। उनका दूध चेन्नई के इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रन को भेजा गया। इनके पति, अभिनेता-प्रोड्यूसर विष्णु विशाल ने भी इस पहल को सोशल मीडिया पर साझा किया। ज्वाला ने कहा कि यह दूध प्रीमेच्योर और बीमार बच्चों की जिंदगी बदल सकता है और हर महिला को इसे अपनाना चाहिए। उनका यह कदम न केवल उन बच्चों के लिए वरदान है जिन्हें दूध नहीं मिलता, बल्कि दूध दान को लेकर समाज में सकारात्मक संदेश भी फैलाता है।​

मिल्क बैंक की चुनौतियां और जरूरत

हालांकि देश में मिल्क बैंक बन रहे हैं, लेकिन अभी भी दूध दान करने वाली माताओं की कमी है। कुछ शहरों में जैसे दिल्ली, मुंबई, पुणे, जयपुर, चेन्नई मिल्क बैंक सक्रिय हैं, लेकिन दूध की मांग बहुत अधिक है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूध दान करने वाली माताओं को यह समझना होगा कि उनका यह योगदान कितने नवजातों की जान बचा सकता है। दूध दान की यह परंपरा भारत में सदियों पुरानी है, जो आज भी नवजात शिशुओं के लिए जीवनदाता साबित हो रही है।​

इस प्रकार, ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन नवजातों के लिए अमृत के समान है और ज्वाला गुट्टा जैसी हस्तियों की पहल के कारण यह अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल बच्चों की जान बच रही है बल्कि समाज में एक नई मानवीय चेतना भी जाग्रत हो रही है।

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