अल-अक्सा मस्जिद के नीचे इज़राइल द्वारा की जा रही खुदाई, इस्लामी प्राचीन वस्तुओं को नष्ट करने का प्रयास

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फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने कहा है कि इजरायल अल-अक्सा मस्जिद परिसर के नीचे अवैध खुदाई कर रहा है और इस्लामी प्राचीन वस्तुओं को नष्ट कर रहा है। यह एक गंभीर और चल रही समस्या है जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है।

मौजूदा स्थिति

जेरूसलम गवर्नोरेट ने 31 अगस्त, 2025 को स्पष्ट किया कि लीक हुए वीडियो में अल-अक्सा मस्जिद के नीचे अवैध खुदाई और तोड़फोड़ के ऑपरेशन दिखाए गए हैं। इस वीडियो में कुछ लोगों को अल-अक्सा मस्जिद परिसर में खुदाई के बाद बड़े पत्थर तोड़ते हुए देखा जा सकता है।

इन गतिविधियों में उमय्यद काल की इस्लामी कलाकृतियों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है, जो मुसलमानों के इस स्थान पर वैध अधिकार का जीवंत प्रमाण हैं।

https://twitter.com/WBobservr/status/1962204967076294822

फिलिस्तीनी प्राधिकरण के आरोप

फिलिस्तीनी अधिकारियों के अनुसार, इजरायली कब्जाधारी अधिकारियों का उद्देश्य:

  • अल-अक्सा की ऐतिहासिक पहचान मिटाना और “टेम्पल माउंट” की कथित कहानी के पक्ष में तथ्यों को तोड़ना-मरोड़ना है
  • इस्लामी सभ्यता और मानव विरासत पर सीधा हमला करना है
  • नई जमीनी हकीकत बनाना है जो उनकी बस्ती परियोजनाओं और शहर के यहूदीकरण की योजनाओं की सेवा करे

अंतर्राष्ट्रीय कानूनी चिंताएं

फिलिस्तीनी प्राधिकरण और कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन इन कार्यों को अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और सम्मेलनों का स्पष्ट उल्लंघन बताते हैं। इस्लामी शैक्षणिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (ISESCO) ने भी इन गतिविधियों की निंदा करते हुए कहा है कि ये 1954 के हेग सम्मेलन और चौथे जेनेवा सम्मेलन का स्पष्ट उल्लंघन हैं।

खुदाई का दायरा और प्रभाव

पुरातत्वविद् जमाल अम्रो के अनुसार, इजरायल पिछले 60 वर्षों से जेरूसलम में खुदाई कर रहा है, लेकिन पिछले 15 वर्षों में यह परिसर की नींव तक पहुंच गई है। वर्तमान में इजरायल जेरूसलम में 22 खुदाई कर रहा है, जिसमें से चार अल-बुराक (पश्चिमी) दीवार के नीचे और पांच सिलवान पड़ोस के नीचे हैं।

संरचनात्मक खतरे

गवर्नोरेट ने चेतावनी दी है कि ये खुदाई अल-अक्सा मस्जिद की नींव और इसके ऐतिहासिक स्मारकों के लिए खतरा बन रही हैं, जिससे इसकी वास्तुशिल्प स्थिरता को खतरा हो सकता है और अमूल्य ऐतिहासिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं।

यह मुद्दा निरंतर अंतर्राष्ट्रीय निगरानी और हस्तक्षेप की मांग करता है, क्योंकि यह न केवल धार्मिक स्वतंत्रता बल्कि सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के मुद्दों से भी जुड़ा है।

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