7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा बंधक बनाए गए बंधकों की तलाश के लिए इजरायली सेना ग़ज़ा में कई तरह के हथकंडे अपना रही है, लेकिन साड़ी कोशिशों के बावजूद सेना को कैदियों की मौजूदगी का कोई ठोस सबूत अभी तक नहीं मिला है।
इस हवाले से इजरायली सेना ने पिछले कुछ दिनों में ग़ज़ा में कई कब्रिस्तानों में कब्रों को खोद डाला। इजरायली सेना का कहना था कि वह युद्ध के दौरान मारे गए बंधकों की तलाश कर रही है।
इसी सिलसिले में इजराइली सेना ने ग़ज़ा में पम्फलेट गिराए हैं, जिसमें उनसे कहा गया है कि बंधकों की तलाश में मदद करके वे अपना और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के साथ ही उचित इनाम भी पा सकते हैं।
बंदियों की तलाशी के लिए पम्फलेट
अल अरबिया के अनुसार ग़ज़ा पट्टी के निवासियों ने कहा कि इजराइल की सेना ने शनिवार को ग़ज़ा भर में ठिकानों पर बमबारी की, जबकि उसके विमानों ने ग़ज़ा पट्टी के दक्षिण में रफा क्षेत्र में विस्थापित फिलिस्तीनियों को निशाना बनाते हुए पम्फलेट गिराए जिनमे बेघर फ़िलस्तीनों से कैदियों की तलाश में मदद करने को कहा गया है।
ये भी पढ़ें:-
- ब्राजील: रियो डी जनेरियो के जंगल में हेलीकॉप्टर क्रैश, जलने से पायलट समेत 4 लोगों की मौत

- सिंधु घाटी सभ्यता पर पाकिस्तान के दावे को भारत ने किया खारिज, कहा— ‘आतंकवाद फैलाने वाला देश सांस्कृतिक विरासत पर हक नहीं जता सकता’

- शिप MV Golden Leo पर मिसाइल हमले में 4 भारतीयों की मौत, सरकार ने जताया कड़ा ऐतराज

इज़राइल ने अपनी सेनाएँ वापस बुलानी शुरू कर दीं
निवासियों ने बताया कि फ़िलिस्तीनी लड़ाकों ने उत्तरी ग़ज़ा में जबालिया क्षेत्र के पूर्वी बाहरी इलाके में फिर से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे टैंकों से लड़ाई की। दूसरी ओर, इज़राइल ने अपनी सेनाएँ वापस बुलानी शुरू कर दीं और छोटे पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
ग़ज़ा में स्वास्थ्य मंत्रालय ने घोषणा की कि पिछले 24 घंटों में इजरायली हमलों में 165 लोग मारे गए और 280 घायल हुए, जो 2024 में एक दिन में होने वाली मौतों की सबसे अधिक संख्या है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी पुष्टि की कि 7 अक्टूबर को युद्ध शुरू होने के बाद से 24,927 फिलिस्तीनी, ज्यादातर नागरिक मारे गए हैं।
सरकारी हिब्रू मीडिया के अनुसार, यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हिरासत में लिए गए लोगों के परिवारों ने बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को अविश्वसनीय बताया है।
नेतन्याहू सरकार से विश्वास उठा
इज़राइल ब्रॉडकास्टिंग अथॉरिटी ने उन्हें यह कहते हुए उद्धृत किया कि उन्होंने “नेतन्याहू और उनकी सरकार पर विश्वास खो दिया है। वह अपना काम करेंगे” लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह क्या करना चाहते हैं।
लापता व्यक्तियों के एक रिश्तेदार के हवाले से उन्होंने कहा, “बातचीत में किसी भी तरह की देरी से उनकी जान को खतरा हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि बंदियों के दर्जनों परिवार उत्तरी इजरायली शहर कैसरिया गए और वहां नेतन्याहू के घर के सामने धरना दिया। वे रात भर वहीं रुकेंगे।
प्राधिकरण ने खुलासा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों के परिवारों ने पिछले हफ्ते मिस्र के खुफिया अधिकारियों से संपर्क किया और उनके परिवारों की रिहाई में मध्यस्थता करने की कोशिश पर चर्चा की।
उन्होंने उनके हवाले से कहा, “हम अपना काम खुद करने की पहल कर रहे हैं।”
गौरतलब है कि ग़ज़ा पट्टी में चल रहे इजरायली युद्ध का एक घोषित लक्ष्य ग़ज़ा पट्टी में 7 अक्टूबर के बंधकों की तलाश करना और उनकी जिंदा वापसी है।
माना जाता है कि ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनी लड़ाकों की हिरासत में अभी भी 130 से अधिक इज़रायली कैदी हैं।
- उज्जैन: महाकाल मंदिर मार्ग से हटाए गए अवैध निर्माण, बुलडोजर कार्रवाई में कई दुकानें और होटल ध्वस्त

- बिहार: चंपारण में दर्दनाक हादसा, छठी के कार्यक्रम में आर्केस्ट्रा देख रहे लोगों को बस ने कुचला; 5 की मौत, कई घायल

- NIA Raids Anantnag Resident’s Home in Terror Probe; Mobile Phone Confiscated

- Kupwara Man Chargesheeted by Kashmir EOW in J&K Bank Job Scam

- ‘भाजपाइयों के लिए शिक्षा सिर्फ व्यापार है…’: जयपुर में कॉजपा सदस्यों पर हमले पर भड़के अखिलेश यादव

- वर्जीनिया के अटॉर्नी जनरल जे जोन्स ने वाणिज्यिक ड्राइवरों की निजी जानकारी मांगने की ट्रम्प प्रशासन की मांग पर लगाई रोक

