मुंबई/रामपुर: उर्दू शायरी की दुनिया का एक चमकता सितारा आज हमेशा के लिए खामोश हो गया। उत्तर प्रदेश के रामपुर से ताल्लुक रखने वाले विश्व प्रसिद्ध शायर ताहिर फराज़ का मुंबई के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे।
ताहिर फराज़ न केवल भारत, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुशायरों की जान माने जाते थे। उनकी सादगी और दिल को छू लेने वाले तरन्नुम ने उन्हें करोड़ों प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाया था।
अदबी सफर और पहचान
ताहिर फराज़ ने अपनी गजलों के जरिए मोहब्बत, फलसफा और मानवीय संवेदनाओं को बेहद खूबसूरती से पिरोया। उनकी मशहूर गजलों को जगजीत सिंह जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज दी, जिससे उन्हें घर-घर में पहचान मिली। उनकी सबसे चर्चित पंक्तियों में से एक आज भी लोगों की जुबान पर रहती है:
“बहुत अजब है ये बंदिश-ए-मोहब्बत भी, कोई किसी को न पाए तो मर भी जाता है।”
रामपुर में शोक की लहर
उनके निधन की खबर मिलते ही उनके पैतृक निवास रामपुर में गम का माहौल है। अदबी हलकों से जुड़े लोगों का कहना है कि ताहिर फराज़ ने रामपुर की गौरवशाली शायरी की परंपरा को पूरी दुनिया में आगे बढ़ाया। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरना नामुमकिन है।
अंतिम विदाई
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार,उनको आज ज़ौहर की नमाज़ के बाद मुंबई में ही उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी देश-दुनिया के बड़े शायरों और उनके प्रशंसकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
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