निर्वाचन आयोग ने तेलंगाना सरकार को 28 नवंबर से पहले ‘रायथु बंधु’ योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने की मंजूरी दे दी है। ‘रायथु बंधु’ योजना किसानों को ‘निवेश सहायता’ के रूप में वित्तीय मदद प्रदान करने से जुड़ी है।
हैदराबाद: चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों के लिए आदर्श आचार संहिता की बात करता है, ताकि सभी राजनीतिक दलों को बराबरी का मौका मिल सके। वो चुनाव के दौरान वोटरों को इतर माध्यमों से प्रभावित ना कर सकें। लेकिन तेलंगाना में चुनाव से ठीक पहले 65 लाख किसानों के खाते में ‘रायथु बंधु’ योजना के तहत 7300 करोड़ से ज्यादा की रकम भेजे जाने का आदेश देकर उसने अपनी निष्पक्षता और गरिमा को ही तिलांजलि दे दी है।
तेलंगाना के 65 लाख से ज्यादा किसानों को चुनाव से ठीक पहले ‘रायथु बंधु’ योजना की नकद रकम जारी करने के आदेश को लेकर चुनाव आयोग कठघरे में है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव से ऐन पहले तेलंगाना के किसानों को इस योजना के तहत नकद रकम जारी करने का आदेश सरासर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है। हैरानी की बात ये है कि ऐसा चुनाव आयोग तेलंगाना की केसीआर सरकार को चुनाव में मदद पहुंचाने के मकसद से कर रहा है। कांग्रेस पार्टी ने जहां चुनाव आयोग के इस आदेश पर कड़ा एतराज जताया है, वहीं बीजेपी इसका समर्थन कर रही है। सूबे में बीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार किसानों को मदद पहुंचाने वाली इस योजना राशि के बंटवारे का विरोध नहीं करेगी।
चुनाव आयोग ने शुक्रवार की जारी अपनी एक विज्ञप्ति में कहा था कि तेलंगाना सरकार ने रबी-2023 के लिए रायतु बंधु स्कीम के तहत 5000 रुपए नकद प्रति एकड़ सहायता राशि 24 नवंबर से बंटवारे का आदेश मांगा था। चुनाव आयोग ने इसी आवेदन को संज्ञान में लेते हुए तेलंगाना सरकार को रायतु बंधु स्कीम की दूसरी किश्त जारी करने का आदेश दिया है। तेलंगाना चुनाव से 5 दिन पहले इस योजना की मंजूरी से आहत कांग्रेस ने इसपर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर तेलंगाना में केसीआर सरकार को मदद पहुंचा रहा है। जो चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन है।
चुनाव आयोग ने रबी फसल के लिए रायतु बंधु योजना की दूसरी किस्त जारी करने का आदेश देते हुए ये भी कहा है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान डीबीटी योजनाओं पर कोई रोक लागू नहीं होगी। इधर इस योजना के तहत तेलंगाना सरकार अब 28 नवंबर को यहां के 65 लाख से ज्यादा किसानों के खाते में 5000 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से नकदी सीधे उनके बैंक खाते में भेजेगी। तेलंगाना सरकार के मुताबिक इस योजना के तहत करीब 7300 करोड़ रुपए किसानों के खाते में सीधे भेजे जाएंगे।
गौरतलब है कि तेलंगाना की केसीआर सरकार ने बीते 18 नवंबर को रायतु बंधु योजना की दूसरी किस्त जारी करने का आदेश चुनाव आयोग से मांगा था। जबकि इससे पहले कांग्रेस ने 23 अक्तूबर को ही चुनाव आयोग को कहा था कि रायतु बंधु योजना के तहत नकदी किसानों को वोटिंग से ठीक पहले देने का असर चुनाव पर पड़ सकता है। लिहाजा इस डीबीटी स्कीम को चुनाव तक रोका जाना चाहिए। या फिर नकदी का बंटवारा 3 नवंबर से पहले किय़ा जाना चाहिए। ताकि इसका कोई असर चुनाव पर ना पड़े।
इधर तेलंगाना कांग्रेस के अध्यक्ष ए रेवंत रेड्डी का कहना है कि चुनाव से ठीक पहले रायतु बंधु योजना के तहत 65 लाख किसानों के खाते में नकद रकम जाने का असर चुनाव पर पड़ेगा। लिहाजा चुनाव आयोग को कम से कम ये आदेश जारी करना चाहिए कि बीआरएस के नेता चुनावी सभाओं और रैलियों में इसका उल्लेख ना करें। ए रेवंत रेड्डी ने साफ कहा कि चुनाव आयोग के ताजा आदेश से स्पष्ट है कि केंद्र में बीजेपी की सरकार और बीआरएस के बीच फेविकोल से भी ज्यादा मजबूत गठबंधन है। तभी बीजेपी केसीआर सरकार की मददगार बनी हुई है। ताकि चुनाव में सरकारी धन का उपयोग कर वोटरों को प्रभावित किया जा सके।
तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने यहां के किसानों से अपील की है कि वो केसीआर के रायतु बंधु योजना के तहत मिलने वाली राशि के छलावे में ना आएं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने किसानों को दो फसलों के 10 हजार की जगह 15 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से देने का वादा किया है। ऐसे में अगर कांग्रेस की सरकार आती है तो बाकी की रकम का बंटवारा भी कांग्रेस सरकार की ओर से किया जाएगा।
उन्होंने इस योजना में उन किसानों को शामिल करने की बात भी कही है जो बटाईदारी पर खेती करते हैं, ताकि उन्हें भी रायतु बंधु योजना का लाभ मिल सके। वहीं बीआरएस नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने इस योजना की रकम को रोकने की हरसंभव कोशिश की है। वहीं मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के सतत प्रय़ासों से ही रबी फसल के लिए किसानों के खाते में रकम पहुंचनी शुरू हो गई है। बीजेपी ने इस मामले में अबतक खुलकर कुछ नहीं बोला है। हालांकि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का कहना है कि रायतु बंधु जैसी डीबीटी स्कीमों को रोकने का हमारी सरकार का कोई इरादा नहीं है।
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