रियाद: सऊदी अरब ने दशकों पुरानी विवादास्पद कफाला (प्रायोजन) प्रणाली को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया है, जिसे मानवाधिकार संगठन लंबे समय से “आधुनिक गुलामी” करार देते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, जून 2025 में घोषित और अक्टूबर में लागू किया गया यह ऐतिहासिक सुधार क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के महत्वाकांक्षी विजन 2030 कार्यक्रम का हिस्सा है, जो सऊदी समाज को आधुनिक बनाने और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
1.3 करोड़ श्रमिकों को मिलेगा लाभ
सूत्रों के मुताबिक, इस सुधार से सऊदी अरब में कार्यरत लगभग 1.3 करोड़ विदेशी श्रमिकों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 42 प्रतिशत हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इनमें 25 से 26 लाख भारतीय नागरिक शामिल हैं, जो निर्माण, स्वास्थ्य सेवा, घरेलू कार्य और अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। अधिकांश प्रवासी श्रमिक भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और फिलीपींस से आए हैं।
क्या थी कफाला प्रणाली
विशेषज्ञों के अनुसार, कफाला शब्द अरबी भाषा में “प्रायोजन” के लिए प्रयोग होता है, जो 1950 के दशक में तेल-समृद्ध खाड़ी अर्थव्यवस्था के विकास के लिए विदेशी श्रम के प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। इस प्रणाली के तहत, हर प्रवासी श्रमिक एक स्थानीय प्रायोजक यानी कफील से बंधा होता था, जो उनके निवास, रोजगार और कानूनी स्थिति पर पूर्ण नियंत्रण रखता था।
सूत्रों के अनुसार, यह व्यवस्था कालांतर में व्यापक दुरुपयोग का स्रोत बन गई। नियोक्ता श्रमिकों के पासपोर्ट जब्त कर सकते थे, वेतन में देरी या इनकार कर सकते थे, और उनकी आवाजाही को प्रतिबंधित कर सकते थे। कफील की अनुमति के बिना, श्रमिक न तो नौकरी बदल सकते थे, न घर लौट सकते थे, और न ही दुर्व्यवहार के मामले में कानूनी सहायता ले सकते थे।
“आधुनिक गुलामी” के आरोप
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस प्रणाली की तुलना “आधुनिक गुलामी” से की, जिसमें कहा गया कि यह श्रमिकों से उनकी मूलभूत स्वतंत्रता छीन लेती थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने बार-बार इस प्रथा की आलोचना करते हुए खाड़ी देशों पर जबरन श्रम और मानव तस्करी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक प्रभावित घरेलू श्रमिक थे, विशेष रूप से महिलाएं, जो अक्सर एकांत में रहती थीं और जिन्हें सीमित कानूनी सुरक्षा प्राप्त थी। वैश्विक मानवाधिकार समूहों की रिपोर्टों में अत्यधिक काम, वेतन न मिलने और शारीरिक दुर्व्यवहार के कई मामले दर्ज किए गए।
अंतरराष्ट्रीय दबाव का परिणाम
विश्लेषकों के अनुसार, सऊदी अरब का यह निर्णय वर्षों की अंतरराष्ट्रीय जांच और सुधार की मांगों के बाद आया है। यह अन्य खाड़ी देशों के समान कदमों का अनुसरण करता है, जिनमें कतर ने 2022 FIFA विश्व कप की मेजबानी से पहले अपने श्रम कानूनों में बदलाव किया था। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक निवेश आकर्षित करने और देश की छवि सुधारने की इच्छा भी इस निर्णय के पीछे एक प्रमुख कारण रही।
अनुबंध-आधारित नई प्रणाली
सूत्रों के अनुसार, नए ढांचे के तहत, सऊदी अरब अनुबंध-आधारित रोजगार प्रणाली की ओर बढ़ेगा, जिसे श्रमिकों को अधिक स्वतंत्रता और उनके जीवन पर नियंत्रण देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस व्यवस्था के तहत, प्रवासी कर्मचारी अब अपने वर्तमान नियोक्ता की मंजूरी के बिना नौकरी बदल सकेंगे। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि एग्जिट वीजा की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है, जिससे श्रमिक बिना प्रायोजक की अनुमति के देश छोड़ सकेंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस सुधार से श्रमिकों को बेहतर वेतन और शर्तों के लिए बातचीत करने की शक्ति मिलेगी, और वे शोषण या वेतन विवादों के मामले में श्रम अदालतों तक बेहतर पहुंच प्राप्त कर सकेंगे। सऊदी सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था श्रमिकों की स्वतंत्रता को बढ़ाएगी और सऊदी श्रम बाजार की वैश्विक अपील को मजबूत करेगी।
भारतीय श्रमिकों के लिए राहत
भारत के विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव सऊदी अरब के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय नागरिकों के अनुभव को बदल सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह सऊदी अधिकारियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है कि भारतीय नागरिकों के अधिकार संरक्षित रहें और नए ढांचे के तहत विवादों का अधिक निष्पक्ष रूप से समाधान हो सके।
अन्य खाड़ी देशों में स्थिति
जानकारों के अनुसार, हालांकि सऊदी अरब ने यह प्रगतिशील कदम उठाया है, लेकिन कुवैत, ओमान और लेबनान में अभी भी समान प्रणालियां लागू हैं। 2009 में बहरीन मध्य पूर्व में कफाला प्रणाली को समाप्त करने वाला पहला देश बना था, जबकि UAE ने 2015 में अपनी कफाला प्रणाली में ढील दी थी। विशेषज्ञों ने जोर देते हुए कहा है कि स्थायी बदलाव सुनिश्चित करने के लिए इन कानूनों का जमीनी स्तर पर सख्ती से क्रियान्वयन आवश्यक है।
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