टाइटल फिल्म इंडस्ट्री के लोग IFTDA और राइटर एसोशिएशन के विरोध में

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मुंबई: फिल्म इंडस्ट्री के सदस्य IFTDA और राइटर एसोशिएशन के विरोध में दिनांक 20/1/23 को IFTDA एंडियन फिल्म टीवी एसोशिएशन के सदस्यों की एक मीटिंग मो. इरफ़ान जमियावाला की अध्यक्षता में शकुंतलम हाल आदर्श, नगर में हुई, जहाँ सभी सदस्यों ने अपनी अपनी समस्या बताई।

इरफान जामियावाला ने बताया किस तरह से राइटर एसोशिएशन गरीब और प्रतिभा शाली लेखक को आवाज़ उठाने पर संस्था से निकाल देते हैं, सभी ने कहा कि IFTDA और राइटर एसोशिएशनअब हाई जैक हो गया है और वहाँ अब पूर्ण रूप से लोकतंत्र को धूमिल किया जा रहा है। सदस्यों के साथ दुर्वेव्हार किया जा रहा है, और जब कोई सदस्य आवाज़ उठता है तो उसको सस्पेंड कर दिया जाता है।

मीटिंग में कहा गया कि कोरोना काल में लाखों रुपया संस्था में आया फिर भी सदस्य भूखे मरे, ऐसी संस्था किस काम की है?

एक सदस्य ने रोते रोते कहा कि कोरोना से पहले से काम नही है मेरे पास और अब संस्था मेल के द्वारा रिनुअल् फीस मांग रही है, घर में खाने को नही है तो संस्था की फीस कहाँ से दू,अब आत्म हत्या के सिवा कोई चारा नही है, सभी सदस्यों ने कहाँ की IFTDA और राइटर एसोशिएशन अब पूरी तरह से भ्रष्ट्राचार का अड्डा बन गया है और एक ही आदमी का संस्था बन गया है, इसलिए में संस्था के लोगों से नम्र निवेदन करता हूँ की ये कानून बने की जो सदस्य एक बार अध्यक्ष या सचिव बने उसे 5 साल तक दूसरा अवसर नही दिया जाए, एक सदस्य हसन अंसारी ने कहाँ की जो टाइटल हम पंजीकरण लेखक, या निर्माता एसोशिएशन में पंजीकृत कराते है उसे हम से छींकर बड़े बड़े निर्माता को दे दिया जाता है ये कैसा इंसाफ है, महिला निर्देशक शमा खाँ ने भी कहाँ की IFTDA और लेखक एसोशिएशन के अधिकारी खुद को राजा से कम नही समझते, वही वरिष्ठ निर्देशन शंभु प्रसाद ने कहाँ की जब हम पूरी जिंदगी फिल्म इंडस्ट्री को दे देते है और जब बुढा हो जाते हैं तो घर वाले नही पूछते इसलिए संस्था हमे एक पेंशन दे, संस्था में 2 बार कमिटी मेम्बर रहे वरिष्ठ निर्देशक क. चंद्रा ने संस्था में चुनाव के संबंध में लोगों को अवगत कराया उन्होंने बताया की किस तरह से IFTDA लोकतंत्र की प्रक्रिया को छिनन भिन्न कर रही है और चुनाव 1 साल में होता था वो अब 5 साल में कर दिया, सीनियर निर्देशक राजू कुलकर्णी ने साफ साफ लफ़्ज़ों में कहाँ की IFTDA पूरी तरह से बर्बाद और भ्रष्ट्राचार का अड्डा बनता जा रहा है, ब्रजेश पालीवाल ने अपना दुखड़ा सुनाते हुए कहाँ की संस्था को कोरोना काल में सभी सदस्यों की रिनुअल् फीस माफ कर देना चाहिए, चाँद मेहता जो की हमेशा लोगों के लिए आवाज़ उठाते हैं उन्होंने तो कहाँ की अब में ये सब देख के थक गया हूँ हम लोगों को मिलकर ठोस कदम उठाना चाहिए और एक पत्र भारत सरकार को लिखे जिनपर सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हो, वही वरिष्ठ निर्देशक कुलवंत सिंह ने खुले लफ़्ज़ों में कहा की अब किसी भी संस्था की मनमानी नही चलेगी और हम आप के साथ है, आफताब काब्रि ने कहा की वो जब संस्था में गए तो उनको बोला गया की आपने 2 साल से फीस नही दिया अगर आप आगे रिनुअल् कराना चाहते हैं तो आपको 1000 रूपया जुर्माना भरना पड़ेगा, अब आप ही बताये इन्होंने किया गुनाह किया था की जुर्माना भरे, सभी सदस्यों ने अपना अपना विचार रखा और IFTDA और लेखक एसोशिएशन की शोषण और हिटलर शाही की गाथा बयाँ किया, में भारत सरकार से नम्र निवेदन करता हूँ की फिल्म इंडस्ट्री के समस्याओं को सुने और और समाधान करे।।

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