वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका का सबसे उन्नत और दुनिया का सबसे महंगा विमानवाहक पोत, USS Gerald R. Ford (CVN 78), एक अजीबोगरीब संकट का सामना कर रहा है। 13 अरब डॉलर की लागत से बने इस युद्धपोत की आधुनिक सीवेज प्रणाली (Sewage System) बार-बार खराब हो रही है, जिससे इस पर तैनात 4,600 नौसैनिकों के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
मुख्य बिंदु: क्यों चर्चा में है USS गेराल्ड आर. फोर्ड?
- लगातार तकनीकी खराबी: 2017 में नौसेना में शामिल होने के बाद से ही इस पोत की वैक्यूम-आधारित सीवेज प्रणाली में ब्लॉकेज की समस्या बनी हुई है।
- 42 बार मांगी गई मदद: रिपोर्ट्स के अनुसार, 2023 से अब तक कम से कम 42 बार मरम्मत के लिए बाहरी तकनीकी सहायता बुलानी पड़ी है।
- 2026 में भी संकट बरकरार: वेनेजुएला तट पर 2025 के अभियानों के बाद, यह समस्या 2026 में भी जारी है।
- मध्य पूर्व में तैनाती: यह समस्या ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण इस पोत की तैनाती को विस्तार दिया गया है।
युद्ध क्षमता पर क्या होगा असर?
हालांकि सीवेज सिस्टम की विफलता चालक दल के रहने की स्थिति को प्रभावित करती है, लेकिन अमेरिकी नौसेना (US Navy) के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि:
“इन तकनीकी समस्याओं का जहाज की युद्ध क्षमता (Combat Capability) या परिचालन तत्परता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। विमानवाहक पोत किसी भी मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है।”
वैक्यूम सिस्टम की चुनौती
USS गेराल्ड आर. फोर्ड में कमर्शियल एयरलाइंस की तरह ही वैक्यूम-सीवेज सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन 4,000 से अधिक लोगों की मौजूदगी के कारण यह सिस्टम बार-बार जाम हो रहा है, जिसे साफ करने के लिए एसिड फ्लशिंग और विशेष रसायनों का उपयोग करना पड़ता है, जो काफी महंगा और समय लेने वाला काम है।
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