नई दिल्ली | 24 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश में पिछले छह वर्षों के दौरान लापता हुई महिलाओं और लड़कियों के चौंकाने वाले आंकड़ों ने देश भर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमात-ए-इस्लामी हिंद (JIH) के महिला विभाग की राष्ट्रीय सचिव रहमतुन्निसा ए. ने इस स्थिति पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए इसे एक ‘गंभीर सामाजिक और संस्थागत विफलता’ करार दिया है।
50,000 से ज्यादा महिलाएं अब भी ‘लापता’
हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा में हुए खुलासे का हवाला देते हुए रहमतुन्निसा ए. ने कहा कि राज्य में बीते 6 सालों में 2,69,500 महिलाएं और लड़कियां लापता हुईं, जिनमें से 50,000 से अधिक का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। 48,000 महिलाओं और 2,200 लड़कियों के केस को ‘पेंडिंग’ टैग किया जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
शहरी सुरक्षा और जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग की मांग
रहमतुन्निसा ए. ने बयान में कहा:
“हर आंकड़े के पीछे एक बेटी, बहन और माँ है। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों से इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का गायब होना बताता है कि हमारी अर्बन सेफ्टी ऑडिट और जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग में भारी कमी है। यह केवल एक राज्य का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का संकट है।”
नैतिक पतन और डिजिटल अश्लीलता पर प्रहार
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जमात की सचिव ने आधुनिक समाज में बढ़ते नैतिक संकट पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि:
- डिजिटल अश्लीलता और पोर्नोग्राफी: मीडिया और इंटरनेट पर महिलाओं को एक वस्तु (Objectification) के रूप में पेश करने से समाज उनके प्रति असंवेदनशील हो गया है।
- धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की कमी: सभी धर्म महिलाओं के सम्मान की सीख देते हैं, लेकिन नैतिक संयम की कमी ने उन्हें तस्करी और शोषण का शिकार बना दिया है।
- धार्मिक आह्वान: उन्होंने क़ुरआन (4:1) का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘उस गर्भ का सम्मान करो जिसने तुम्हें जन्म दिया।’ महिलाओं की सुरक्षा में लापरवाही एक गंभीर नैतिक चूक है।
जमात-ए-इस्लामी हिंद की प्रमुख मांगें
देश में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने हेतु जमाअत ने सरकार से निम्नलिखित ठोस कदम उठाने की मांग की है:
- राष्ट्रीय कार्य योजना: एक बड़े स्तर पर नेशनल एक्शन प्लान बने जिसमें तस्करी विरोधी इकाइयां सक्रिय हों।
- पारदर्शिता: लापता महिलाओं के ‘पेंडिंग’ केस की जांच के लिए एक स्पष्ट समय सीमा तय की जाए।
- पुनर्वास प्रणाली: बचाई गई लड़कियों और महिलाओं के लिए सशक्त पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था हो।
- सामुदायिक सतर्कता: सिविल सोसाइटी और धार्मिक संगठन मिलकर चुप्पी की संस्कृति को तोड़ें और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाएं।
रहमतुन्निसा ए. ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है। जो समाज अपनी महिलाओं की रक्षा नहीं कर सकता, वह अपनी नैतिक बुनियाद खो देता है।
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