आयुष्मान कार्ड होते हुए मरीज़ को बाहर निकाला

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रामपुर के अस्पताल में एक गरीब के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद उसको बाहर से दवाई लिख कर दी गई। गरीब मरीज़ ने जब अपनी मजबूरी बताई तब गरीब मरीज को स्टाफ ने बाहर निकाल दिया और कहा आप कहीं और इलाज करा लो।

इस बात से जिला अस्पताल में काफी हंगामा हुआ और कई सामाजिक संस्था के लोग और व्यापारी नेता गरीब मरीज के पक्ष में उतर आए और उन्होंने इस बात पर काफी नाराजगी दिखाई और हंगामा भी किया और सीएमओ से इसकी शिकायत भी की।

रामपुर/सऊद खान: रामपुर का जिला अस्पताल हमेशा अपने काम की वजह से सुर्खियों में रहता है, अच्छे कामों की वजह से नहीं अपनी गलत हरकतों की वजह से।
मरीज़ों के साथ दुर्व्यवहार करना, उनको बाहर से दवाई लिख कर देना और इलाज के नाम पर पैसों की मांग करना यहाँ की रोज़ की शिकायतें है।

रामपुर के जिला अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में गरीब प्यारे लाल सैनी नामक एक व्यक्ति पिछले तीन-चार दिन से भर्ती है। उसके पास केंद्र सरकार का आयुष्मान भारत का कार्ड भी है। इस कार्ड पर 5 लाख का मेडिकल कवर है और इस कार्ड से गरीब मरीज़ अपना इलाज किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में निशुल्क करा सकता है।

ये सब मालूम होने के बावजूद जिला अस्पताल के डाक्टर और स्टाफ नर्स ने उसको बाहर निकाल दिया जब इस बात का पता कुछ सामाजिक संस्था के लोगों को लगा तो वो जिला अस्पताल पहुंचे और इस हरकत पर उन्होंने विरोध किया और सीएमओ से इसकी शिकायत की।
सीएमओ सुबोध कुमार ने तुरंत सीएमएस से बात की और प्यारे लाल का इलाज कराने को कहा।

वहीं इस मामले पर व्यापारी नेता संदीप अग्रवाल ने बताया यहां पर एक मरीज़ को बाहर से दवाएं लिखने का मामला सामने आया था। आम जनता से उसने शिकायत की तो स्टाफ ने पुलिस के द्वारा उनका उत्पीड़न किया। यहां व्यापार मंडल के लोगों ने आकर शांति व्यवस्था कायम कर दी है और सीएमओ ने अस्पताल के स्टाफ की जिम्मेदारी ली है और दोबारा इस तरह की घटना ना हो इसका आश्वासन भी दिया है।

वहीं हमने इस मामले पर जिला अस्पताल के सीएमएस बीएस नागर से बात की तो उन्होंने बताया दो-तीन दिन से मरीज प्यारेलाल पेइंग वार्ड में भर्ती है और हमने इनको अपने पास से भी काफी दवाइयां दी हैं। साफ़ ज़ाहिर है कि सीएमएस अब अपना बचाव करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि मरीज ने अपने आयुष्मान भारत कार्ड के बारे में शुरू में नहीं बताया और अब जब हंगामा हुआ तब बताया है और इसी बात पर स्टाफ नर्स और मरीज के तीमारदारों में बात काफी बढ़ गई है और स्टाफ तीमारदार के ऊपर और तीमारदार स्टाफ नर्स के ऊपर आरोप लगा रहे हैं।

रामपुर जिला अस्पताल में यह सब आम हो गया है लेकिन आयुष्मान कार्ड गरीबों के इलाज के लिए ही सरकार ने बनाए थे जब सरकारी अस्पताल में ही उस कार्ड से इलाज नहीं होगा तो प्राइवेट अस्पताल का तो ऊपरवाला ही मालिक है।

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