नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की बनीं अंतरिम प्रधानमंत्री

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नेपाल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है। संसद भंग और Gen-Z के उग्र आंदोलनों के बाद पहली महिला पीएम के रूप में कार्की की नियुक्ति, राजनीतिक स्थिरता और भ्रष्टाचार विरोधी उम्मीदों के लिए ऐतिहासिक कदम बनी है।

नेपाल: नेपाल ने राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक प्रदर्शनों के बीच एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया है। कार्की ने शुक्रवार देर रात शपथ ग्रहण किया। इसके साथ ही वह नेपाल की पहली महिला अंतरिम प्रधानमंत्री बन गई हैं।

सुशीला कार्की का नाम प्रमुख राजनीतिक दलों और जन-ज़ी आंदोलन के प्रतिनिधियों के बीच आम सहमति के आधार पर तय किया गया। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शपथ ग्रहण समारोह रात 9 बजे आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल, शीर्ष सैन्य अधिकारी और जन-ज़ी विरोधी समूहों के नेता मौजूद रहे।

ओली के इस्तीफे के बाद उठा कदम

देश में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भड़के जन-ज़ी के प्रदर्शनों ने बीते हफ्तों में नेपाल की राजनीति को हिला कर रख दिया। इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें करीब 51 लोगों की मौत हुई और 1,300 से अधिक लोग घायल हुए। इस जन दबाव के चलते प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा और संसद को भंग कर दिया गया।

सुशीला कार्की: न्यायपालिका से राजनीति तक

सुशीला कार्की (73) का जन्म 7 जून 1952 को पूर्वी नेपाल के विराटनगर के शंकरपुर-3 में हुआ था, जो भारतीय सीमा के पास स्थित है। वह जुलाई 2016 में नेपाल की 24वीं मुख्य न्यायाधीश नियुक्त हुई थीं और इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला बनीं। कार्की लगभग 11 महीने तक शीर्ष पद पर रहीं और न्यायपालिका में अपने सख्त और ईमानदार रुख के लिए जानी जाती हैं।

अब अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में, उनसे उम्मीद की जा रही है कि वह तनावग्रस्त राजनीतिक हालात को संभालेंगी और देश को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगी।

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