आज़म ख़ान की रिहाई, सपा के लिए मज़बूती या चुनौती?

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शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश: सीतापुर जेल से रिहाई के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और रामपुर से विधायक रहे आज़म खां सोमवार को शाहजहाँपुर पहुँचे। यहाँ उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए समर्थकों और शुभचिन्तकों का आभार जताया।

आजम खान ने कहा, “सबका बहुत शुक्रिया। बहुत सी दुआएं उन लोगों के लिए, जिन्होंने मेरे कठिन समय में मेरा साथ दिया।

बसपा में शामिल होने की अटकलों पर सफाई

हाल के दिनों में यह चर्चा तेज़ रही थी कि आज़म खां समाजवादी पार्टी को छोड़कर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का रुख कर सकते हैं। इस सवाल पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अटकलें लगाने वाले लोग ही इस बात का जवाब बेहतर दे सकते हैं।

उन्होंने कहा, “मैं जेल में पाँच साल रहा। उस दौरान न तो किसी से मुलाक़ात हुई और न ही मुझे फ़ोन करने की इजाज़त थी। मैं पूरी तरह से बाहरी संपर्क से कट गया था। इसलिए इस विषय पर जो भी बातें हो रही हैं, उनके बारे में वही जान सकते हैं जो अटकलें लगा रहे हैं।

रिहाई के बाद लगातार चर्चा में

आजम खां की लगभग पाँच साल की जेल यात्रा के बाद उनकी रिहाई से यूपी की सियासत में हलचल मच गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि उनकी अगली रणनीति क्या होगी और वे आने वाले चुनावों में किस मोर्चे पर नज़र आएंगे।

हालांकि, आज़म खां अब तक किसी नई राजनीतिक लाइन पर खुलकर नहीं बोले हैं। उन्होंने केवल इतना कहा कि वे समर्थकों और शुभचिन्तकों की दुआओं से रिहा हुए हैं और समय आने पर आगे की रणनीति सामने रखेंगे।

सपा के लिए चुनौती या मजबूती?

आजम खान लंबे समय तक सपा राजनीति का अहम चेहरा रहे हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनका बड़ा आधार माना जाता है। उनकी रिहाई को सपा के लिए मजबूती और विपक्षी दलों के लिए चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं, अंदरूनी खींचतान और बदलते समीकरणों के बीच उनके अगले कदम का इंतजार सभी को है।

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