“मैं राजनीति में आना नहीं चाहता था, इंदिरा गांधी द्वारा मुझे राजनीति में लाया गया”- आजम खान

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रामपुर: सीतापुर जेल में 23 महीने बिताने के बाद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खान ने मीडिया से बात करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा की खास यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि राजनीति में उनका कदम इंदिरा गांधी द्वारा ही बढ़ाया गया था, जिन्होंने उन्हें उस समय जबरदस्ती राजनीति में खींचा था, जबकि वह एलएलएम की पढ़ाई के फाइनल साल में थे।

आज़म खान ने कहा, “मेरा राजनीति में आने का इरादा खुद का नहीं था। मैं तो बच्चों को पढ़ाना चाहता था और मेरी नौकरी लग रही थी। लेकिन इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के दौर में मुझे राजनीति में जबरदस्ती ला दिया गया।” यह वह समय था जब देश में इमरजेंसी की सियासी स्थितियां द्रुत गति से बदल रही थीं।

आजम खान ने इंदिरा गांधी के उस निर्णय को याद किया, जिसने उनके राजनीतिक जीवन की दिशा तय की। उन्होंने अपने ऊपर लगाए आरोपों के बारे में बात करते हुए कहा कि अगर उन पर लगे किसी भी आरोप का सबूत मिलता है तो वे जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 50 साल के राजनीतिक सफर में उन्होंने कभी कोठी नहीं बनाई।

आजम खान ने मुलायम सिंह से अपने संबंधों के बारे में बात करते हुए बताया कि उस दौर में जहां भी वे उंगली रखते थे, मुलायम सिंह यादव उस पर साइन कर देते थे, क्योंकि उस समय मुलायम मुख्यमंत्री थे और आजम उनकी कैबिनेट में मंत्री के रूप में काम कर रहे थे। उन्होंने इमरजेंसी के बाद राजनीति में अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी व्यक्तिगत लाभ के लिए राजनीति का सहारा नहीं लिया। “न तो मैंने सोने-चांदी के कंगन मांगे, न कोठी या बंगला। सिर्फ बच्चों के लिए कलम मांगी थी, और जिसने दी, उसने मुझसे यह नहीं पूछा कि दस्तखत कहां करने हैं।”

अपने संघर्ष भरे जीवन को याद करते हुए आज़म ने कहा कि राजनीति में भरोसा और सम्मान आसानी से नहीं मिलता, इसे लंबे संघर्ष और मेहनत से अर्जित करना पड़ता है।

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