लखनऊ, 26 फरवरी
UP Expressway List: उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बनने की ओर अग्रसर है, जिसके पास सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे नेटवर्क होगा। फरवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 22 एक्सप्रेस-वे का जाल बिछाने की तैयारी है। इस महा-नेटवर्क में 7 एक्सप्रेस-वे संचालित हैं, 3 निर्माणाधीन हैं और 12 पाइपलाइन में हैं।
इस इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि औद्योगिक माल ढुलाई की लागत (Logistics Cost) में भी भारी कमी आएगी।

एक्सप्रेस-वे नेटवर्क की वर्तमान स्थिति: एक नज़र में
यूपी में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
| स्थिति | संख्या | मुख्य नाम |
| संचालित (Operational) | 07 | पूर्वांचल, बुंदेलखंड, आगरा-लखनऊ, यमुना, दिल्ली-मेरठ, नोएडा-ग्रेटर नोएडा, गोरखपुर लिंक। |
| निर्माणाधीन (Under Construction) | 03 | गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज), लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे आदि। |
| प्रस्तावित/स्वीकृत (Proposed) | 12 | विंध्य एक्सप्रेस-वे (प्रयागराज-सोनभद्र), गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस-वे आदि। |
गंगा एक्सप्रेस-वे: सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट
निर्माणाधीन परियोजनाओं में 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे गेम-चेंजर साबित होगा। यह पश्चिमी यूपी के मेरठ को संगम नगरी प्रयागराज से जोड़ेगा। इसके अलावा, विंध्य एक्सप्रेस-वे (320 किमी) जैसे प्रोजेक्ट्स प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य औद्योगिक धारा से जोड़ने का काम करेंगे।
औद्योगिक पार्कों से चमकेगी अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने जापान दौरे के दौरान प्रदेश की आर्थिक प्रगति का रोडमैप साझा किया। उन्होंने एक्सप्रेस-वे के किनारे 27 इंडस्ट्रियल पार्क विकसित करने की योजना पर काम शुरू करने की जानकारी दी।
इसका मुख्य लाभ:
- लॉजिस्टिक लागत में कमी: बेहतर सड़कों से माल ढुलाई तेज होगी, जिससे उत्पाद सस्ता और प्रतिस्पर्धी बनेगा।
- निवेशक आकर्षण: औद्योगिक कॉरिडोर और वेयरहाउसिंग के विकास से देशी-विदेशी निवेशकों के लिए यूपी पहली पसंद बनेगा।
- क्षेत्रीय संतुलन: बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ने से क्षेत्रीय आर्थिक असमानता खत्म होगी।
रोजगार और विकास का नया मॉडल
एक्सप्रेस-वे आधारित यह विकास मॉडल यूपी की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर की ओर ले जाने का आधार बनेगा। निर्माण कार्य से प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है, जबकि एक्सप्रेस-वे के किनारे लगने वाली फैक्ट्रियों से लाखों लोगों के लिए दीर्घकालिक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
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