लखनऊ, 19 फरवरी: उत्तर प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना के प्रति अभिभावकों का भरोसा नई ऊंचाइयों को छू रहा है। योगी सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में लाई गई पारदर्शिता और सरलता का ही परिणाम है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के प्रथम चरण में ही आवेदकों की संख्या में 97% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मुख्य आंकड़े: पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुने आवेदन
इस वर्ष प्राप्त आवेदनों के आंकड़े चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं:
- सत्र 2026-27 (प्रथम चरण): 2,61,501 आवेदन
- सत्र 2025-26 (प्रथम चरण): 1,32,446 आवेदन
- कुल वृद्धि: लगभग 97 प्रतिशत
जागरूकता और सरल प्रक्रिया बनी सफलता की कुंजी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा विभाग ने इस बार आरटीई प्रक्रिया को बेहद सुगम बनाया है। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण रहे हैं:
- डिजिटल सरलीकरण: ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को यूजर-फ्रेंडली बनाया गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावक भी आसानी से फॉर्म भर सके।
- व्यापक अभियान: ग्राम और वार्ड स्तर पर चलाए गए जागरूकता कार्यक्रमों ने वंचित वर्ग तक योजना की जानकारी पहुंचाई।
- पारदर्शिता: हेल्पडेस्क की स्थापना और समयबद्ध सूचना तंत्र ने अभिभावकों के मन में सिस्टम के प्रति विश्वास पैदा किया।
सामाजिक समावेशन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर जोर
आरटीई योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) और वंचित वर्ग (DG) के बच्चों को निजी स्कूलों में 25% आरक्षित सीटों पर मुफ्त प्रवेश मिलता है। आवेदनों में आई यह “सुनामी” इस बात का संकेत है कि अब गरीब से गरीब अभिभावक भी अपने बच्चे के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना देख रहा है।
“आवेदनों में यह दोगुनी वृद्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि समाज की बदलती सोच का प्रतीक है। अब अभिभावक शिक्षा को ही अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य का एकमात्र रास्ता मान रहे हैं।” — बेसिक शिक्षा विभाग
आगे क्या?
सरकार का लक्ष्य है कि आरटीई के माध्यम से हर पात्र बच्चे को निजी स्कूल में प्रवेश मिले। प्रथम चरण की इस सफलता के बाद अब विभाग नामांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने की तैयारी में जुट गया है।
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