लखनऊ | 31 जनवरी, 2026 (डॉ. एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती)
उत्तर प्रदेश और बिहार ने कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए ‘डिजिटल टेक्नोलॉजी’ और ‘डेटा-संचालित कृषि’ को अपनाने के लिए हाथ मिलाया है। लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के महिला किसान संघ ‘भूस्वामिनी’ और बिहार के पहले एफपीओ महासंघ ‘बिहप्रो कन्सोर्टियम’ के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस रणनीतिक साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक खेती से आगे ले जाकर ‘कृषि-उद्यमी’ (Agri-Preneurs) के रूप में स्थापित करना है।
📋 एमओयू (MoU) के प्रमुख स्तंभ और रणनीतिक उद्देश्य
| क्षेत्र | फोकस बिंदु |
| टेक्नोलॉजी | डिजिटल डेटा और AI आधारित निर्णय प्रणाली का क्रियान्वयन। |
| जलवायु | ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ (Climate Smart Agriculture) पद्धतियों का विस्तार। |
| बाजार | कृषि उत्पादों की सीधी खरीद-बिक्री और सशक्त सप्लाई चेन का निर्माण। |
| कौशल | संयुक्त क्षमता विकास (Capacity Building) और तकनीकी प्रशिक्षण। |
🌐 डिजिटल खेती और डेटा-आधारित निर्णय प्रणाली
इस समझौते के तहत खेती में Precision Farming (सटीक खेती) को बढ़ावा दिया जाएगा।
- तथ्य आधारित कृषि: महिला किसान अब पारंपरिक अनुमानों के बजाय सटीक डेटा (मिट्टी की नमी, पोषक तत्व, और मौसम का पूर्वानुमान) के आधार पर निर्णय लेंगी।
- स्थायित्व (Sustainability): क्लाइमेट स्मार्ट प्रैक्टिसेज के माध्यम से कम संसाधनों में बेहतर और टिकाऊ उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा।
💼 ग्रामीण उद्यमिता और आर्थिक सशक्तिकरण
उत्तर प्रदेश सरकार के विजन के अनुरूप, महिला किसानों को अब केवल उत्पादक तक सीमित नहीं रखा जाएगा।
- वैल्यू एडिशन (Value Addition): उत्पादों की ग्रेडिंग, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।
- मार्केट लिंकेज: ‘भूस्वामिनी’ और ‘बिहप्रो’ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क बनाएंगे जिससे उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक सीधी पहुंच मिले।
- रोजगार सृजन: प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट्स के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गैर-कृषि रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
🤝 नेतृत्व और विजन
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान बिहप्रो के अध्यक्ष राजकुमार राज और भूस्वामिनी की अध्यक्ष मंजू देवी ने साझा बयान में कहा कि यह सहयोग दोनों राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा। डिजिटल खेती और संगठित व्यापारिक ढांचे के समन्वय से न केवल किसानों की आय दोगुनी होगी, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी गुणात्मक सुधार आएगा।
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