नई दिल्ली: केंद्र सरकार अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने जा रही है। नई योजना का नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी’ रखा गया है। शुक्रवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
बैठक में जनगणना के लिए बजट आवंटन समेत कई अहम फैसलों पर मुहर लगी। मनरेगा का नाम बदलने का यह प्रस्ताव इन्हीं में शामिल था। यूपीए सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना को अब नए नाम से जाना जाएगा।
गौरतलब है कि हाल ही में केंद्र सरकार ने देश के सभी राजभवनों का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया था, वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर को ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है।
मनरेगा योजना की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 200 जिलों में की थी। वर्ष 2008 के अंत तक इसे देश के सभी 593 जिलों में लागू कर दिया गया था। इस योजना के तहत ग्रामीण गरीबों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी जाती है। वर्तमान सरकार इसे बढ़ाकर 125 दिन करने की तैयारी में है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना में अब तक करीब 15 करोड़ 40 लाख लोग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। शुक्रवार की बैठक में ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार गारंटी बिल 2025’ को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि नए नाम से इस योजना को नई पहचान और दिशा मिलेगी।
कैबिनेट बैठक में शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा एक और अहम प्रस्ताव भी रखा गया। इसमें ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल 2025’ पेश किया गया है, जिसे शीघ्र मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का दावा है कि यह प्रस्ताव देश की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक विकसित व प्रभावी बनाएगा।
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