UP Budget 2026-27: ‘यह भाजपा का विदाई बजट है’, अखिलेश यादव ने आंकड़ों की ‘बाजीगरी’ पर घेरा

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानमंडल में बुधवार को पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ₹9.12 लाख करोड़ के इस बजट को ‘जनविरोधी’ और ‘दिशाहीन’ बताते हुए इसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का ‘विदाई बजट’ करार दिया है।

बजट के आकार और उपयोगिता पर उठाए सवाल

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत अब तक के सबसे बड़े बजट पर टिप्पणी करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि केवल बजट का आकार बढ़ाने से जनता का कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस विशाल धनराशि से प्रदेश के किसानों, नौजवानों और गरीबों के जीवन में क्या वास्तविक बदलाव आएगा?

“बजट केवल बड़े आकार का है, लेकिन इसमें जनहित के विजन का अभाव है। यह सरकार केवल आंकड़ों के मायाजाल और भारी-भरकम विज्ञापनों के माध्यम से राज्य की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है।” — अखिलेश यादव

सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर डेटा-आधारित प्रहार

पूर्व मुख्यमंत्री ने पिछले वित्तीय वर्ष के खर्चों का हवाला देते हुए सरकार की प्रशासनिक क्षमता (Administrative Efficiency) पर प्रश्नचिह्न लगाया। उन्होंने दावा किया कि सरकार पिछले बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च करने में विफल रही है। उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार:

  • खर्च का औसत: सरकार औसतन 50% बजट भी खर्च नहीं कर पा रही है।
  • प्रमुख विभागों की स्थिति: कृषि क्षेत्र में आवंटित राशि का मात्र 57%, ग्राम्य विकास में 36% और बेसिक शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में केवल 62% धनराशि ही खर्च की जा सकी है।
  • अक्षमता का आरोप: उन्होंने कहा कि जब बजट खर्च करने की बारी आती है, तो विभाग विफल साबित होते हैं, जो सीधे तौर पर सरकार की अक्षमता को दर्शाता है।

1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी और विकास दर पर तंज

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश को ‘एक ट्रिलियन डॉलर’ की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को तकनीकी आधार पर चुनौती दी। उन्होंने कहा कि 2025-26 के लिए अनुमानित ₹36 लाख करोड़ की GSDP के साथ यह लक्ष्य हासिल करना असंभव है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए उत्तर प्रदेश की GSDP को ₹90 लाख करोड़ होना चाहिए, जिसके लिए 30% की विकास दर अनिवार्य है। सरकार द्वारा पेश किए जा रहे आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बहुत बड़ा अंतर है। साथ ही, उन्होंने प्रति व्यक्ति आय के मामले में यूपी के पिछड़ेपन पर भी चिंता जताई।

कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सपा प्रमुख ने तीखा रुख अपनाते हुए प्रदेश में ‘संगठित भ्रष्टाचार’ का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस और अपराधी अब एक ही टीम का हिस्सा बन गए हैं, जिसका नेतृत्व सत्ताधारी दल कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की वजह से ही पुलिस अपराधों पर लगाम लगाने में विफल है और आंकड़ों को कम दिखाने के लिए मुकदमे दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।

संकल्प पत्र की अनदेखी

अखिलेश यादव ने अंत में कहा कि भाजपा सरकार अपने ‘संकल्प पत्र’ में किए गए वादों को पूरी तरह भूल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बजट बेरोजगारी दूर करने या निवेश लाने में पूरी तरह विफल साबित होगा और प्रदेश की जनता चुनाव में इसका करारा जवाब देगी।

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