रामपुर में विकास को नई दिशा: डीएम अजय कुमार द्विवेदी के एक साल में औद्योगिक निवेश, जनकल्याण और योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर

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औद्योगिक कॉरिडोर के लिए भूमि चिन्हांकन की पहल; निवेश बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने पर प्रशासन का फोकस

रामपुर: जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने के दौर में रामपुर में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ औद्योगिक निवेश के लिए संभावनाएं तलाशने की पहल भी सामने आई है। जुलाई 2026 की मुख्यमंत्री डैशबोर्ड रैंकिंग में 9.58 अंक के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल करने वाले जिले में अब औद्योगिक कॉरिडोर के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान की दिशा में तैयारी की जा रही है।

औद्योगिक कॉरिडोर के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश

उपलब्ध कराए गए प्रशासनिक विवरण के अनुसार, जनपद में UPEIDA डेडिकेटेड इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की स्थापना के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की पहल की गई है। इस संबंध में उपजिलाधिकारी सदर और तहसीलदार सदर को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। निर्देशों के क्रम में दोनों अधिकारियों ने संभावित भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर चिन्हांकन की कार्रवाई की।

यह पहल जिले में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रारंभिक तैयारी है। फिलहाल परियोजना के लिए चिन्हित भूमि का क्षेत्रफल, संबंधित गांवों के नाम, निवेश की राशि और निर्माण की समयसीमा का विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में इसे औद्योगिक कॉरिडोर की स्थापना की दिशा में प्रारंभिक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि परियोजना की अंतिम स्वीकृति अथवा निर्माण शुरू होने के रूप में।

निवेश और रोजगार के नए अवसरों पर फोकस

प्रशासनिक विवरण में इस पहल का उद्देश्य जनपद में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना और क्षेत्र के समग्र आर्थिक विकास को गति देना बताया गया है। प्रस्तावित कॉरिडोर के माध्यम से जिले में उद्योगों की स्थापना के लिए संभावनाएं तलाशने पर जोर है।

हालांकि, अभी किसी निवेशक कंपनी, प्रस्तावित औद्योगिक इकाई या रोजगार की निश्चित संख्या का विवरण सामने नहीं रखा गया है। इसलिए निवेश और रोजगार को इस पहल के लक्ष्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित होगा; इन्हें अभी प्राप्त उपलब्धि नहीं कहा जा सकता।

भूमि चिन्हांकन से परियोजना के क्रियान्वयन तक रहेगा ध्यान

औद्योगिक विकास की इस पहल का अगला महत्वपूर्ण पक्ष चिन्हित भूमि से संबंधित प्रक्रिया और परियोजना की औपचारिक स्थिति स्पष्ट होना है। आगे की प्रगति का आकलन सक्षम स्तर की स्वीकृतियों, भूमि की उपलब्धता, आधारभूत सुविधाओं की योजना और वास्तविक निवेश प्रस्तावों के आधार पर किया जा सकेगा।

जिला प्रशासन ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और रोजगार की संभावनाओं को विस्तार देने की प्रतिबद्धता जताई है। अब इस पहल की वास्तविक उपलब्धि का पैमाना यह होगा कि भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया किस तरह स्वीकृत परियोजना, स्थापित औद्योगिक इकाइयों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार में बदलती है।

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