उत्तराखंड(समीर शेख़): उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार लाख कोशिशें कर रही है, लेकिन विभागीय अधिकारी ही उनके प्रयासों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। जसपुर की गुर्जर बस्ती के 65 बच्चों की शिक्षा पर संकट मंडरा रहा है, जहां 14 सालों से चल रहा एक वैकल्पिक शिक्षा केंद्र अचानक बंद कर दिया गया था। हाल ही में ग्रामीणों के दबाव और नेताओं की मध्यस्थता के बाद यह केंद्र तो दोबारा शुरू हुआ है, लेकिन फिर से बंद होने का डर अब भी बना हुआ है।
उधम सिंह नगर के, जसपुर विधानसभा क्षेत्र के करनपुर की गुर्जर बस्ती में, 50 सालों से रह रहे 65 परिवारों के बच्चे इसी शिक्षा केंद्र में पढ़ते थे। ये परिवार पशुपालन पर निर्भर हैं और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। 2009 में केंद्र सरकार की एक योजना के तहत यहां वैकल्पिक शिक्षा केंद्र की शुरुआत की गई थी। यहाँ के 65 बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ाई करते थे, लेकिन 31 मार्च 2024 को इस केंद्र को बिना किसी आदेश के बंद कर दिया गया।

स्थानीय विधायक आदेश चौहान और उपजिलाधिकारी से ग्रामीणों ने मुलाकात की और अपनी परेशानी बताई। इसके बाद केंद्र को पुनः चालू करने का आदेश मिला, लेकिन अभी भी इस केंद्र का भविष्य अनिश्चित है।
शिक्षा अधिकारी का कहना है कि सरकार का उद्देश्य बच्चों को स्थाई विद्यालयों में पढ़ाना है, लेकिन गुर्जर बस्ती से निकटतम विद्यालय लगभग 6-7 किलोमीटर दूर है। रास्ते में जंगली जानवरों का खतरा और खराब सड़कें हैं, जिससे बच्चों के लिए वहां जाना मुश्किल हो जाता है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी कुंवर सिंह रावत का कहना है कि बच्चों के लिए ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अभी इस केंद्र को एक साल तक और चलाने की योजना बनाई गई है।
गुर्जर बस्ती के बच्चों की शिक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है, और यह जरूरी है कि सरकार और प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान दे। शिक्षा केंद्र बंद होने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है, और यह समाज के उन तबकों की अनदेखी का प्रतीक है, जिन्हें शिक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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