नई दिल्ली/वाशिंगटन: ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ‘जनता का रिपोर्टर’ की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के जवाबी हमलों ने न केवल इजरायल के बुनियादी ढांचे को हिला दिया है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति कहे जाने वाले अमेरिका के सैन्य भंडार पर भी संकट खड़ा कर दिया है।
प्रमुख घटनाक्रम:
1. बेन गुरियन एयरपोर्ट पर ईरान का बड़ा हमला: ईरान ने इजरायल के प्रमुख बेन गुरियन एयरपोर्ट (Ben Gurion Airport) को निशाना बनाते हुए भीषण बमबारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की खुर्रमशहर-4 (Khorramshahr-4) मिसाइलों ने इजरायली हवाई क्षेत्र में अपना दबदबा दिखाया। दावा किया जा रहा है कि इस हमले में एयरपोर्ट पर खड़े अमेरिकी F-35 जेट्स को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इस हमले के बाद इजरायली उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा और एयरपोर्ट के कई हिस्सों में आग लगने की खबरें आईं।
2. अमेरिका में हथियारों की किल्लत और भारी खर्च: युद्ध के मात्र सातवें दिन ही पेंटागन ने कांग्रेस से 50 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त सैन्य बजट की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास टोमहॉक (Tomahawk), THAAD इंटरसेप्टर और पैट्रियट मिसाइलों की भारी कमी हो गई है। यह युद्ध अमेरिकी करदाताओं को रोजाना 1 बिलियन डॉलर की भारी चपत लगा रहा है, जबकि देश के भीतर लगभग 3.6 करोड़ लोग गरीबी से जूझ रहे हैं।
3. ईरान के अंदर के हालात (CNN की रिपोर्ट): ट्रम्प और नेतन्याहू की उम्मीदों के विपरीत, ईरान की राजधानी तेहरान में जीवन सामान्य बना हुआ है। CNN की एक ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, वहां की दुकानों में सामान भरा हुआ है, गैस स्टेशनों पर कोई लंबी कतारें नहीं हैं और जनता के बीच किसी भी तरह की घबराहट (Panic) नहीं देखी गई है।
4. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर: ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट मंडराने लगा है। तेल और गैस की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। बताया जा रहा है कि फ्रांस के लगभग 52 जहाज अरब की खाड़ी में और 8 जहाज लाल सागर में फंसे हुए हैं।
5. अंतरराष्ट्रीय आलोचना और BBC पर आरोप: ब्रिटेन में बीबीसी (BBC) पर इस युद्ध के दौरान ‘फेक न्यूज’ और पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करने के गंभीर आरोप लगे हैं।.] वहीं, कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और पूर्व ब्रिटिश मंत्रियों ने इस हमले को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध ट्रम्प प्रशासन की एक बड़ी भूल साबित हो सकता है, क्योंकि ईरान ने ‘समय’ के साथ खेलने की रणनीति अपनाई है, जिससे अमेरिका को आर्थिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
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