जमीयत उलमा-ए-हिंद ने बाढ़ पीड़ितों को सौंपे मकान; मौलाना मदनी बोले- ‘कश्मीर ही नहीं, कश्मीरी भी हमारे हैं’

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नई दिल्ली/उधमपुर | 7 फरवरी 2026 (डॉ. एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती): जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को नवनिर्मित मकानों की चाबियां सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने देश के मौजूदा हालात, कश्मीर नीति और सांप्रदायिक सौहार्द पर बेबाकी से अपनी राय रखी।

“दिलासा सबने दिया, मगर घर जमीयत ने बनाया”

पुनर्वास कार्यक्रम के पहले चरण में 15 मकानों का वितरण किया गया, जिनमें 7 विधवाएं भी शामिल हैं। राजस्थान जमीयत के सहयोग से बने इन घरों की चाबियां पाकर प्रभावित भावुक हो गए। लाभार्थियों ने कहा, “बाढ़ के बाद बहुत से लोग दिलासा देने आए, लेकिन जमीयत ने हमारे दर्द को समझा और हमें सिर छिपाने की छत दी।”

मानवता की सेवा ही धर्म: मौलाना मदनी

मकानों के वितरण के दौरान मौलाना मदनी ने कहा कि आपदा कभी धर्म पूछकर नहीं आती। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • बिना भेदभाव मदद: जमीयत हर धर्म के जरूरतमंद की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
  • कश्मीर नीति: कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और कश्मीरी हमारे अपने हैं। हमें डंडे के जोर पर नहीं, बल्कि दिल जीतकर उन्हें साथ रखना होगा।
  • सहिष्णुता की मिसाल: उन्होंने पहलगाम की घटनाओं का जिक्र करते हुए कश्मीरियों के आपसी भाईचारे की सराहना की।

नफरत के सौदागरों को नेपाल से लेना चाहिए सबक

मौलाना मदनी ने ‘हिंदू राष्ट्र’ की मांग करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि धर्म आधारित राष्ट्र की सोच प्रगति में बाधक है। उन्होंने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोकतांत्रिक और संवैधानिक बदलाव से भारत को सीखना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि:

  1. संविधान की रक्षा: सेक्युलरिज़्म और भारतीय संविधान को बचाने के लिए जमीयत आखिरी दम तक संघर्ष करेगी।
  2. पहचान पर हमला: उत्तराखंड और हिमाचल में कश्मीरी व्यापारियों को निशाना बनाना अमानवीय और असंवैधानिक है।
  3. सांप्रदायिकता का खतरा: आज विकास और शिक्षा के बजाय नफरत और मजहबी मुद्दों पर चुनाव लड़े जा रहे हैं, जो देश के विनाश का रास्ता है।

“एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा जब ज़ालिमों के गले में ज़ंजीरें होंगी और देश फिर से प्यार, मोहब्बत और इंसाफ़ की छाया में तरक़्क़ी करेगा।” — मौलाना अरशद मदनी

उम्मीद की किरण: ‘नफरत का जवाब मोहब्बत’

मौलाना मदनी ने मुसलमानों और अल्पसंख्यकों से अपील की कि वे मौजूदा कठिन हालात से मायूस न हों। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर सत्य का दीपक हमेशा जलता रहा। उन्होंने शांति और धैर्य की सलाह देते हुए कहा कि नफरत का मुकाबला सिर्फ मोहब्बत से ही मुमकिन है।

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