पांच साल सत्ता की मलाई चाटने के बाद कथित जनसेवक एक बार फिर जनता की सेवा करने
के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं. मानो जन सेवा ही इनका परम धर्म है, इसके लिए वह अपनी विचार धारा , पार्टी के प्रति निष्ठा, वफ़ा दारी सब ताक़ पर रख चुनावी दंगल में कूदने को तैयार हैं. टिकट की जुगत में अपनो से संबंध तोड़ अपने धुर विरोधियों की शरण में जाने में न उन्हें कोई परहेज़ है न शर्म लिहाज़ और न ही जवाब देही की कोई फिक्र.

सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा है कि एक बार चढ़ जाए तो दूध पिलाया सांप कब नेवला बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता.
कहते हैं कि सत्ता का नशा ही कुछ ऐसा है कि एक बार चढ़ जाए तो दूध पिलाया सांप कब नेवला बन जाए कुछ कहा नहीं जा सकता. महत्वाकांक्षाओं का अतिरेक, कुर्सी का मोह चुनावी समर में अच्छे- अच्छों के कपड़े उतरवा देता है.
ऐसे ही योद्धाओं ने “उत्तर प्रदेश” ही नहीं “उत्तराखण्ड” की राजनीति में भी भूचाल ला रखा है. चुनाव की तारीख सर पे आ जाने पर भी नेताओं के दल बदल का सिलसिला जारी है. स्वयं राजनीति में सैटल होने के बाद अपने परिवार का भविष्य भी राजनीति में तलाशते नज़र आ रहे हैं.
परिवार वाद को पानी पी-पीकर कोसने वालों को अपने बेटे- बहु ही नहीं , बेटी- दामाद के लिए भी टिकट चाहिए .
पार्टी द्वारा ‘मन की बात’ न सुनने पर माननीयों का रातोंरात पार्टी से मोह भंग हो जाता है. यह जानते हुए भी कि सत्ता रूढ़ पार्टी में मन की बात कहने का अधिकार केवल एक ही व्यक्ति को है.
इस उहा पोह के माहौल में समर्थकों की फजीहत होना लाज़मी है क्योंकि, वो बेचारे रात को जिस झंडे के साथ होते हैं सुबह उसे त्यागने का फरमान जारी हो जाता है. नेता जी तो पांच साल बाद नए ब्रांड, नई ऊर्जा के साथ अवतरित होने का दम ख़म रखते हैं.
- नेपाल के सुनसरी में सांप्रदायिक हिंसा के बाद कर्फ्यू, 3 की मौत: जानें क्या है पूरा मामला
- संभल: ‘गांव-गांव तक पहुंचाएं संगठन की विचारधारा’, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की बैठक में बोले मज़ाहिर ख़ान
- जौहर यूनिवर्सिटी से भर्ती घोटाले तक: आजम ख़ान पर ED का शिकंजा कसने की तैयारी, रामपुर पुलिस ने भेजीं 84 मुकदमों की फाइलें
- रामपुर: आजम खान से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे जज का तबादला, ‘क्वालिटी बार’ केस टला
- समाधान दिवस में पहुंचीं 13 शिकायतें, मौके पर एक का भी निस्तारण नहीं
