“यह यात्रा का अंत नहीं है” : जानिए क्यों खास रही IAS आंजनेय कुमार सिंह की 11 साल की यूपी पारी

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उत्तर प्रदेश की नौकरशाही में अपनी बेबाक और निर्भीक कार्यशैली के लिए अलग पहचान बनाने वाले 2005 बैच के सिक्किम कैडर के आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह की यूपी में 11 साल लंबी प्रतिनियुक्ति अब समाप्त हो गई है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) से आठवां सेवा विस्तार न मिलने के बाद सभी अटकलों पर विराम लग गया है और राज्य सरकार ने 2009 बैच की आईएएस अधिकारी संगीता सिंह को मुरादाबाद मंडल की नई कमिश्नर नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही आंजनेय कुमार सिंह की अपने मूल कैडर सिक्किम वापसी तय हो गई है।

पत्रकारिता से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मूल निवासी आंजनेय कुमार सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और पूर्वांचल विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की। मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पत्रकारिता से जुड़े रहे और 2005 में सिविल सेवा (IAS) में चयनित हुए।

15 फरवरी 2015 को वे पहली बार 5 साल की अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति पर उत्तर प्रदेश आए। इस दौरान उन्होंने सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के विशेष सचिव, बुलंदशहर के जिलाधिकारी, वाणिज्य कर के अतिरिक्त आयुक्त और फतेहपुर के डीएम के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

रामपुर का कार्यकाल, आजम खान से टकराव और मुरादाबाद कमिश्नर का रिकॉर्ड

19 फरवरी 2019 को आंजनेय कुमार सिंह को रामपुर का जिलाधिकारी बनाया गया। यही वह दौर था जब रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के साथ उनका प्रशासनिक और कानूनी टकराव सुर्खियों में आया।

  • कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई: रामपुर डीएम के पद पर रहते हुए उन्होंने जौहर ट्रस्ट, अवैध भूमि कब्जों और सरकारी संपत्तियों से जुड़े मामलों में निष्पक्ष व सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की।
  • मुरादाबाद कमिश्नर पद पर लंबा कार्यकाल: 6 मार्च 2021 को पदोन्नति के बाद उन्हें मुरादाबाद मंडल (जिसमें रामपुर, संभल आदि जिले आते हैं) का कमिश्नर बनाया गया। मुरादाबाद कमिश्नर के रूप में साढ़े पांच साल तक लगातार पदस्थ रहने का एक नया रिकॉर्ड भी उनके नाम दर्ज हुआ।

जब ‘शिक्षा के मंदिर’ और छात्रों के भविष्य के लिए अडिग रहे

सूत्रों और प्रशासनिक चर्चाओं के अनुसार, रामपुर की चर्चित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने और उसकी इमारतों को ध्वस्त करने का भारी दबाव था। हालांकि, आंजनेय कुमार सिंह ने किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया। उनका मानना था कि व्यवस्थाएं और नेता बदलते रहते हैं, लेकिन “शिक्षा का मंदिर” छात्रों की उम्मीदों और उनके उज्ज्वल भविष्य का केंद्र होता है।

यूनिवर्सिटी की इमारतों को गिराकर छात्रों के करियर को तबाह करने के बजाय, उन्होंने अपने रुख पर कायम रहना चुना—भले ही इसके लिए उन्हें अपनी सेवा और पद का नुकसान यानी अपनी ‘नौकरी की कुर्बानी’ क्यों न देनी पड़े। आंजनेय कुमार का यह कदम आज उन तमाम युवाओं और छात्रों के लिए मिसाल बन गया है, जो इस यूनिवर्सिटी में शिक्षा हासिल कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ियां उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद रखेंगी जिसने ईंट-पत्थरों से ज्यादा छात्रों के भविष्य की कीमत समझी।

7 सेवा विस्तार का अनोखा रिकॉर्ड

आईएएस सेवा नियमावली के तहत अंतर-कैडर प्रतिनियुक्ति सामान्य तौर पर अधिकतम 5 वर्षों की होती है। लेकिन यूपी में उनकी उपयोगिता और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें 1-1 साल के 5 और 6-6 महीने के 2 सेवा विस्तार दिए। 11 साल का यह कार्यकाल और 7 बार एक्सटेंशन पाना अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड रहा।

जनता के बीच लोकप्रियता और भावुक विदाई

आंजनेय कुमार सिंह ने अपने सोशल मीडिया पेज पर महादेवी वर्मा और अज्ञेय की पंक्तियों के साथ एक भावुक संदेश भी साझा किया और संकेत दिया कि “यह यात्रा का अंत नहीं है”।

11 वर्षों की सेवा के बाद उनकी सिक्किम वापसी उत्तर प्रदेश प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में लंबे समय तक याद रखी जाएगी।

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