जामिया में अभिज्ञानशाकुन्तलम् पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, संस्कृत पांडुलिपि परंपरा पर चर्चा

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International Lecture on Abhijnana Shakuntala at Jamia, Discussion on Sanskrit Manuscript Tradition
जामिया में अभिज्ञानशाकुन्तलम् पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, संस्कृत पांडुलिपि परंपरा पर चर्चा

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में संस्कृत विभाग व IASS के संयुक्त तत्वावधान में ‘अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ विषयक अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित हुआ। कार्यक्रम में संस्कृत पांडुलिपि परंपरा, भाषा व सांस्कृतिक महत्ता पर शोधपूर्ण चर्चा की गई।

नई दिल्ली, 18 सितंबर 2025: जामिया मिल्लिया इस्लामिया, संस्कृत विभाग और इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ संस्कृत स्टडीज़ (IASS) के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को ‘शारदा पांडुलिपि सन्दर्भे अभिज्ञानशाकुन्तलम्’ विषय पर एक शैक्षिक-गवेषणात्मक विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय के मीर तकी मीर सभागार में भौतिक एवं आभासी माध्यम से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत दीपप्रज्वलन, जामिया तराना और मंगलाचरण से हुई। तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत पादप, प्रतिचिह्न और उपवस्त्र भेंट कर किया गया।

विशिष्ट अतिथि व आयोजन

इस अवसर पर जामिया के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ कार्यक्रम के अध्यक्ष रहे। कुलसचिव प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जबकि मानविकी एवं भाषासंस्थान के संकायाध्यक्ष प्रो. इक्तिदार मोहम्मद खान और संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. जयप्रकाश नारायण विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
सारस्वत अतिथि के रूप में पेरिस स्थित IASS के सचिव प्रो. मैक्कॉमस टायलर ने अपनी उपस्थिति से आयोजन को अंतरराष्ट्रीय आयाम प्रदान किया।

गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद के पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. वसंत के. एम. भट्ट कार्यक्रम के मुख्य वक्ता रहे। मंच संचालन संस्कृत विभाग के आचार्य डॉ. धनञ्जय मणि त्रिपाठी ने किया।

मुख्य वक्तव्य और विचार

प्रो. वसंत भट्ट ने अपने व्याख्यान में प्राचीन पांडुलिपि परंपरा की विशिष्टताओं पर चर्चा की और विभिन्न कालखंडों में हुए पाठांतर भेदों की विवेचना प्रस्तुत की। उन्होंने अभिज्ञानशाकुन्तलम् नाटक की पांडुलिपियों के संदर्भ में विशेष रूप से शारदा, मैथिली, बंगाली, दक्षिणी और देवनागरी लिपियों में उपलब्ध प्रतियों का सूक्ष्म अध्ययन प्रस्तुत किया और उनमें समय-समय पर हुए परिवर्तन उजागर किए।

अतिथियों के विचार

  • प्रो. इक्तिदार मोहम्मद खान ने संस्कृत भाषा और पांडुलिपि परंपरा को संरक्षित और संवर्धित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • कुलसचिव प्रो. महताब आलम रिज़वी ने संस्कृत के वैश्विक महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों और शोधार्थियों से अध्ययन व अनुसंधान के नए दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
  • कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने संस्कृत को विश्व की विविध भाषाओं का स्रोत माना और इसकी भाषावैज्ञानिक व सांस्कृतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने फारसी भाषा में अभिज्ञानशाकुन्तलम् के अनुवाद पर विशेष विवेचन भी प्रस्तुत किया।

समापन

कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता शर्मा ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ यह आयोजन सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर जामिया मिल्लिया इस्लामिया के विभिन्न संकायों के अध्यापकगण, छात्र और शोधार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। साथ ही दिल्ली विश्वविद्यालय से भी कई विद्वानों ने भागीदारी की। यह आयोजन संस्कृत भाषा, साहित्य और पांडुलिपि परंपरा की महत्ता को पुनः रेखांकित करने वाला रहा और प्रतिभागियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण शैक्षिक एवं सांस्कृतिक अनुभव साबित हुआ।