शब-ए-बारात इबादत की रात, आतिशबाज़ी और स्टंट से बचें: मौलाना खालिद रशीद की विशेष एडवाइजरी

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लखनऊ | 1 फ़रवरी, 2026 (डॉ. एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती)

शब-ए-बारात के मुक़द्दस मौक़े पर इस्लामिक सेंटर ऑफ़ इंडिया (ICI), ईदगाह लखनऊ ने मुस्लिम समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण गाइडलाइन जारी की है। इस्लामिक सेंटर में पुलिस प्रशासन और ईदगाह कमेटी के साथ हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में मौलाना खालिद रशीद फ़रंगी महली ने पुरज़ोर अपील की है कि इस रात को केवल इबादत और तौबा में गुज़ारें।

‘नूरानी रात’ की अहमियत और इबादत

बैठक को संबोधित करते हुए मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि शब-ए-बारात नूरानी और फ़ज़ीलत वाली रात है। उन्होंने इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया:

  • इस रात ‘ख़ालिक़-ए-कायनात’ अपने बंदों की रोज़ी, उम्र, सेहत और ज़िंदगी के फैसले फ़रमाता है।
  • यह रात गुनाहों से तौबा करने और अल्लाह की रहमत हासिल करने का ज़रिया है।
  • 15वीं शब को नफ़्ल नमाज़ें पढ़ना और अगले दिन (15 शाबान) रोज़ा रखना सुन्नत है।

युवाओं और ज़ायरीन के लिए ज़रूरी दिशा-निर्देश

अक्सर देखा जाता है कि इस मुक़द्दस रात में कुछ युवा सड़कों पर हुड़दंग करते हैं। इसे देखते हुए मौलाना ने सख्त हिदायत जारी की है:

  1. आतिशबाज़ी पर रोक: इस रात किसी भी तरह की आतिशबाज़ी न करें, यह फ़िज़ूलख़र्ची और गुनाह है।
  2. बाइक स्टंट से बचें: युवा मोटरसाइकिलों से स्टंट न करें और सैर-सपाटे के बजाय इबादत को प्राथमिकता दें।
  3. पार्किंग का ध्यान: जो लोग कब्रिस्तानों में ईसाले सवाब (दुआ) के लिए जा रहे हैं, वे अपनी गाड़ियाँ केवल निर्धारित पार्किंग स्थल पर ही खड़ी करें ताकि ट्रैफ़िक व्यवस्था न बिगड़े।
  4. मदद और दुआ: अपने लिए और देश की तरक़्क़ी व अमन-चैन के लिए दुआ करें। गरीबों और बीमारों की आर्थिक मदद कर अपने मरहूमों को सवाब पहुँचाएँ।

“शब-ए-बारात दिखावे की नहीं, बल्कि अपने रब के सामने झुकने और अपने गुनाहों की माफ़ी मांगने की रात है।” – मौलाना खालिद रशीद फ़रंगी महली

प्रशासन के साथ समन्वय और सुरक्षा

इस वर्ष शब-ए-बारात 3 फ़रवरी को मनाई जाएगी। बैठक में मौजूद डीसीपी (DCP) और पुलिस अधिकारियों से मौलाना ने शहर में सुरक्षा और नगर निगम के अधिकारियों से साफ़-सफ़ाई के विशेष इंतज़ाम करने की मांग की।

बैठक में एसीपी (ACP), विभिन्न थानों के प्रभारी, उलेमा-ए-किराम और सामाजिक कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिन्होंने शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से इस पर्व को मनाने पर सहमति जताई।

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