हिमाचल के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्रीय बजट 2026-27 को राज्य के लिए ‘अन्यायपूर्ण’ करार दिया। राजस्व घाटा अनुदान बंद होने और सेब बागवानों की अनदेखी पर सीएम ने केंद्र को घेरा। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
शिमला | 1 फरवरी, 2026 (डॉ. एम अतहर उद्दीन मुन्ने भारती): हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय बजट 2026-27 को पहाड़ी राज्य की उम्मीदों पर ‘तुषारापात’ करार दिया है। शिमला में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह बजट न केवल विकास विरोधी है, बल्कि हिमाचल जैसे छोटे राज्यों के अस्तित्व के प्रति केंद्र की घोर उदासीनता को भी दर्शाता है।
राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद करना सबसे बड़ा झटका
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1952 से निरंतर मिल रहे राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant) को 16वें वित्त आयोग द्वारा बंद करना हिमाचल की वित्तीय कमर तोड़ने जैसा है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया:
- 15वें वित्त आयोग के दौरान प्रदेश को लगभग 37,000 करोड़ रुपये का अनुदान मिला था।
- अनुच्छेद 275(1) के तहत यह राज्य का अधिकार है, जिसे पहली बार छीन लिया गया है।
- पिछली भाजपा सरकार के समय अंतरिम रिपोर्ट पर भी 11,431 करोड़ की सहायता मिली थी, लेकिन इस बार राज्य को खाली हाथ छोड़ दिया गया है।
बागवानों और किसानों की अनदेखी: 5000 करोड़ की आर्थिकी संकट में
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल की 5,000 करोड़ रुपये की सेब आर्थिकी को बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मैदानी इलाकों के लिए नीतियां बनाते समय केंद्र पहाड़ी भूगोल और खेती की ऊंची लागत को भूल गया। बागवानों के लिए न तो किसी विशेष सहायता पैकेज की घोषणा की गई और न ही कोई नीतिगत समर्थन दिया गया।
पर्यटन और कनेक्टिविटी: बौद्ध सर्किट से हिमाचल बाहर
पर्यटन क्षेत्र पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “पूर्वोत्तर के लिए बौद्ध सर्किट का स्वागत है, लेकिन विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्थलों वाले हिमाचल प्रदेश को इससे बाहर रखना स्पष्ट रूप से ‘सौतेला व्यवहार’ है।” इसके अतिरिक्त:
- रेलवे: भानुपल्ली-बिलासपुर और बद्दी-चंडीगढ़ जैसी सामरिक रेल परियोजनाओं के लिए कोई बजट आवंटित नहीं हुआ।
- पूंजी निवेश: पूंजी निवेश के दावों के बीच आपदा सुरक्षा और जलविद्युत क्षेत्र के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखी।
- ऋण सीमा: राज्य ने ऋण सीमा को 3% से बढ़ाकर 4% करने की मांग की थी, जिसे अनसुना कर दिया गया।
“यह बजट जन-विरोधी और हिमाचल-विरोधी है। केंद्र सरकार कांग्रेस शासित राज्यों के साथ राजनीतिक भेदभाव कर रही है। 15,000 करोड़ की प्राकृतिक आपदा झेलने वाले राज्य की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
— ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री
संघीय ढांचे के लिए खतरे की घंटी
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि जीएसटी मुआवजा बंद होने और कठोर शर्तों के साथ ब्याज मुक्त ऋण (1.5 लाख करोड़) की सीमा न बढ़ाने से राज्य की वित्तीय स्थिरता प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की कि हिमालयी राज्यों के लिए अलग ‘आपदा जोखिम सूचकांक’ बनाया जाए ताकि विकास की लागत और पर्यावरणीय योगदान के आधार पर वित्तीय सहायता मिल सके।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हिमाचल सरकार इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज मजबूती से उठाती रहेगी।
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