भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के सभी 6 दोषियों को रिहा करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड में गिरफ्तार अपराधियों को 33 साल बाद रिहा करने का आदेश जारी किया।
कोर्ट का आदेश आने के एक घंटे बाद ही उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे सभी अभियुक्तों को रिहा कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बी वी नागरत्न की बेंच ने कहा कि इन लोगों के केस में भी एक अभियुक्त ए जी पेरारिवलन के मामले में दिया गया फ़ैसला लागू होगा।
इस साल 18 मई को कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 में दिए गए असाधारण शक्तियों का हवाला देकर पेरारिवलन को रिहा कर दिया था. पेरारिवलन राजीव गांधी हत्याकांड में 30 साल उम्र क़ैद की सज़ा काट चुके थे।
जबकि श्रीहरन, रविचंद्रन, संथन, मुरुगन, एजी पेरारिवलन और रॉबर्ट पायस और जयकुमार को उम्र क़ैद की सज़ा दी गई थी और ये 23 साल जेल में बिता चुके हैं।
बतादें कि राजीव गांधी की 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में श्रीलंका के लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) समूह की एक महिला आत्मघाती हमलावर ने हत्या कर दी थी।
उधर कांग्रेस ने एक बयान जारी कर कहा है, “सुप्रीम कोर्ट का पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा करने का फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य, पूरी तरह गलत।”
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने पार्टी की ओर से बयान जारी कर कहा, “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि उच्चतम न्यायालय ने देश की भावना के अनुरूप कार्य नहीं किया. कांग्रेस पार्टी इसकी स्पष्ट रूप से आलोचना करती है और इसे पूरी तरह अक्षम्य मानती है.”
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