सरकार को न देश की फिक्र, न देशवासियों की” – दानिश अली का केंद्र पर हमला

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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद कुनवर दानिश अली ने केंद्र सरकार के AQI और फेफड़ों की बीमारी के बीच संबंध नकारने वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरा है। अमरोहा से सांसद दानिश अली ने लिखा, “चाहे समाज में हुला हुआ जहर हो या आबोहवा में भरा जहर इस सरकार कौन से देश की फिक्र है, न देशवासियों की!”। यह ट्वीट उस समय आया जब पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 18 दिसंबर को राज्यसभा में कहा कि उच्च AQI स्तर और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करने वाला कोई निर्णायक डेटा उपलब्ध नहीं है।

सरकार का विवादित बयान

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भाजपा सांसद लक्ष्मीकांत बाजपेयी के प्रश्न के उत्तर में यह बयान दिया था। बाजपेयी ने पूछा था कि क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक AQI में लंबे समय तक संपर्क से फेफड़ों में फाइब्रोसिस जैसी बीमारियां हो रही हैं, जिनमें फेफड़ों की क्षमता कम हो जाती है। हालांकि मंत्री ने यह स्वीकार किया कि वायु प्रदूषण सांस से जुड़ी बीमारियों को बढ़ाने वाले कारकों में से एक है, लेकिन उन्होंने इसे “सीधा संबंध” मानने से इनकार कर दिया।

चिकित्सा विशेषज्ञों की असहमति

सरकार के इस दावे पर चिकित्सा विशेषज्ञों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। फेफड़े के कैंसर का इलाज करने वाले एक डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारी के बीच सीधा संबंध है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि जब AQI गंभीर स्तर पर पहुंच जाता है तो दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में अस्थमा अटैक, COPD के केस, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ के मामलों में तेजी आ जाती है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि प्रदूषण का फेफड़ों की सेहत पर कोई असर नहीं होता, तो हर सर्दी में इमरजेंसी रूम इतने भरे क्यों होते हैं।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता की वर्तमान स्थिति

दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी हुई है। 19 दिसंबर को दोपहर 4 बजे दिल्ली का AQI 374 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। CAQM ने Stage 4 GRAP लागू किया है, जिसके तहत गैर-BS VI वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक, निर्माण कार्य पर पाबंदी और बिना PUC सर्टिफिकेट वाले वाहनों के लिए ईंधन की आपूर्ति रोकने जैसे कड़े उपाय शामिल हैं। हालांकि इन प्रतिबंधों के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने के आरोप भी सामने आए हैं।

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