
ग्लोबलटुडे,13 सितम्बर 2019
उबैद इक़बाल खान, दिल्ली
झारखंड के सरायकेला खरसावां में तबरेज़ अंसारी की भीड़ द्वारा की गई लिंचिंग के आरोपियों के विरुद्ध हत्या की धारा 302 को हटा कर गैर इरादतन हत्या 304 लगा कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस के इस रवैये और न्याय की हत्या के विरुद्ध यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन का घेराव किया और न्याय व संवैधानिक मूल्य को बचाने के लिए एकजुटता का आह्वान किया।
इस प्रदर्शन में बड़ी तादाद में सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र एवं शिक्षक, महिलाएं, बच्चे और आम नागरिक शामिल हुए।
इस विरोध प्रदर्शन में आए हुए वक्ताओं ने कहा कि हम सभी ने 20 जून के आसपास चिलिंग वीडियो देखा है, जिसमें तबरेज़ अंसारी को एक पोल से बांधा जा रहा था और बेरहमी से पीटा जा रहा था। उसको तड़पा तड़पा कर मारा जा रहा था और हत्या करने वाले हत्यारों की पहचान करना मुश्किल नहीं था।

चौंकाने वाली बात यह है कि झारखंड पुलिस को घटनास्थल तक पहुंचने में आठ घंटे लग गए, उसने अपने आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय तबरेज को ही हिरासत में ले लिया और उसे उचित चिकित्सकीय देखभाल देने और उसे अस्पताल में भर्ती करने के बजाय जेल में डाल दिया गया ।
तबरेज़ ने चार दिन बाद दम तोड़ दिया। तबरेज़ अंसारी की निर्मम हत्या के विरोध में पूरा देश भड़क गया था और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विरोध प्रदर्शन हुए थे। उसके बाद झारखण्ड पुलिस ने इस अपराध के लिए पप्पू मंडल और कुछ अन्य लोगों को हिरासत में लिया था।
ढाई महीने के बाद, हम यह जानकर स्तब्ध हैं कि इसकी चार्जशीट में उसी पुलिस ने हत्या का आरोप हटा दिया है और पुलिस स्पष्ट रूप से हत्यारों को बचाने का प्रयास कर रही है।
पुलिस की चार्जशीट ने तबरेज की मौत को एक स्वाभाविक घटना के रूप में चित्रित करने की कोशिश की है जो हृदयघात के कारण हुई है, जबकि हम अच्छी तरह से जानते हैं कि उसकी मौत उस पिटाई का नतीजा थी जिसे उसे सहना पड़ा और साथ ही पुलिस द्वारा कर्तव्य पालन की जगह घोर लापरवाही किया गया।हम लिंचर्स और हमलावरों की रक्षा करने के इस बेशर्म प्रयास को स्वीकार नहीं करेंगे, जिन्होंने उस रात तबरेज को अकेला नहीं मारा, बल्कि देश के संविधान को एक बार फिर से लपक लिया।

कार्यक्रम के अंत में रेजिडेंट आयुक्त झारखंड भवन, नई दिल्ली के माध्यम सेमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री, झारखंड को एक ज्ञापन दिया गया जिसमे मांग की गई :
1- तबरेज अंसारी के हत्यारों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज करें।
2- उन पुलिस अधिकारियों को बुक करें जिन्होंने अपने कर्तव्य की उपेक्षा की जिसके कारण तबरेज अंसारी की मृत्यु हुई।
3- सुप्रीम कोर्ट की उस गाइड लाइन को लागू करें, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बनाम तहसीन पूनावाला के मामले में भीड़ को रोकने के लिए जारी किया था। आपके राज्य में लिंचिंग के मामलों की दर पूरी तरह से चिंताजनक है और 2018 में जारी की गई सुप्रीम कोर्ट गाइड लाइन की घोर अनदेखी की गई है।
इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री से एक बार फिर से इस विशेष मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गयी और तबरेज अंसारी को मरणोपरांत न्याय सुनिश्चित करने और इन जैसी क्रूर घटनाओं को भविष्य में होने से रोके जाने के लिए तत्पर प्रयास की भी मांग की गई।
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