अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ज़मीन पर नगर निगम का कब्ज़ा: कानूनी लड़ाई की तैयारी में एएमयू

Date:

अलीगढ़: अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) और अलीगढ़ नगर निगम के बीच 41 बीघा (लगभग 4 हेक्टेयर) ज़मीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह ज़मीन विश्वविद्यालय के हॉर्स राइडिंग क्लब द्वारा दशकों से उपयोग में लाई जा रही थी।

बुधवार, 30 अप्रैल 2025 को, नगर निगम के अधिकारियों ने अचानक इस ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया और वहां एक बोर्ड लगाया जिसमें लिखा था, “यह संपत्ति अलीगढ़ नगर निगम की है”। नगर निगम का दावा है कि यह ज़मीन सरकारी रिकॉर्ड में ‘बंजर’ के रूप में दर्ज है और एएमयू ने इसे अवैध रूप से कब्ज़ा किया हुआ था।

एएमयू प्रशासन ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताया है। विश्वविद्यालय की मुख्य प्रवक्ता विभा शर्मा ने कहा, “एएमयू ने यह ज़मीन 80 साल पहले 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत अधिग्रहित की थी और तब से इसका निरंतर उपयोग कर रहा है। हमें इस संबंध में कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। हम इस मामले में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं।”

नगर निगम के मुख्य अधिकारी विनोद कुमार का कहना है कि एएमयू ने ज़मीन के स्वामित्व के प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए, इसलिए निगम ने कार्रवाई की।

पूर्व एएमयू छात्रसंघ अध्यक्ष डॉ. एम. सलमान इम्तियाज़ ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा, “अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की ज़मीन जिस तरह नगर निगम ने क़ब्ज़ाई है बिना किसी नोटिफिकेशन के वो गेर क़ानूनी है, क्यूँकि पिछले 80 सालों से यूनिवर्सिटी उस ज़मीन पर मालिकाना हक़ रखती है और तमाम काग़ज़ात और सुबूत यूनिवर्सिटी के पास मौजूद हैं। यह एक सेक्युलर इदारा है जो कि राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्व योगदान दे रहा है, इसलिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मिनी इंडिया के नाम से सम्भोदित किया था और चूँकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी केंद्र शासित यूनिवर्सिटी है जिसकी हर एक जानकारी केंद्र सरकार के पास मौजूद है, लिहाजा हम इस ज़मीन क़ब्ज़े की निंदा करते हैं और जो भी लोग इदारे के इस साज़िश में लिप्त हैं उन्हें भी जवाब देना पड़ेगा क्यूँकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से ताल्लुक रखने वाला हर शक्स इस इदारे को अपनी मादरे गारसगाह समझता है जिसके हक़ को पाने के लिए हर तरीक़े से तैयार है।”

Hindguru 2025
https://thehindguru.com/

पूर्व कुलपति लेफ्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने भी इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “बिना उचित कानूनी प्रक्रिया के ऐसी कार्रवाई समझ से परे है। विश्वविद्यालय के पास सभी आवश्यक दस्तावेज़ हैं जो अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे।”

एएमयू के छात्र भी इस मुद्दे पर सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने शुक्रवार को विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा, जिसमें ज़मीन पर लगे बोर्ड को हटाने और विश्वविद्यालय के अधिकारों की रक्षा की मांग की गई।

यह विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। एएमयू प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाएगा। यह मामला न केवल ज़मीन के स्वामित्व का है, बल्कि एक ऐतिहासिक और शैक्षणिक संस्थान की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा की रक्षा का भी है।

Share post:

Visual Stories

Popular

More like this
Related

Jamia’s RCA Shines: 38 Students Clear UPSC 2025 with 4 in Top 50

NEW DELHI: Jamia Millia Islamia’s (JMI) Residential Coaching Academy...

JIH President Condemns US-Israel Aggression on Iran, Warns Against Wider Gulf War

New Delhi: Jamaat-e-Islami Hind (JIH) President Syed Sadatullah Husaini has...