अमेरिका-ईरान संघर्षविराम में पाकिस्तान की ऐतिहासिक मध्यस्थता; वैश्विक कूटनीति में बढ़ा क़द

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दुनिया | न्यूज़ एजेंसी: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने और संघर्षविराम समझौते को लागू कराने में पाकिस्तान ने एक निर्णायक मध्यस्थ (Key Mediator) की भूमिका निभाई है। इसे पाकिस्तान के इतिहास की सबसे बड़ी राजनयिक और कूटनीतिक सफलताओं में से एक माना जा रहा है। देश के नागरिक और सैन्य नेतृत्व के साझा प्रयासों के बाद, पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है और क्षेत्र में एक प्रभावशाली रणनीतिक शक्ति के रूप में उभरा है।

इस्लामाबाद बना शांति वार्ता का मुख्य केंद्र: ब्लूमबर्ग

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी ‘ब्लूमबर्ग’ की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस शांति समझौते को अमलीजामा पहनाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। वे इस ऐतिहासिक युद्धविराम की घोषणा और पहल करने वाले प्रमुख वैश्विक नेताओं में शामिल रहे।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुख्य अंश:

“पाकिस्तान ने ईरानी नेतृत्व के साथ कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें कीं और इस्लामाबाद में अत्यंत गोपनीय व जटिल शांति वार्ताओं की मेजबानी की। पाकिस्तानी कूटनीतिज्ञों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करते हुए वाशिंगटन और तेहरान के बीच दशकों पुराने अविश्वास की खाई को पाटने का काम किया।”

वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की सराहना

वाशिंगटन और तेहरान, दोनों पक्षों के साथ पाकिस्तान के संतुलित और मजबूत समन्वय ने उसे इस मध्यस्थता के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प बनाया। इस बड़ी सफलता पर अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने भी मुहर लगाई है:

  • क्रिस्टोफर क्लीरी (अमेरिकी रक्षा विभाग के पूर्व अधिकारी): उन्होंने कहा कि इस सफल कूटनीति के बाद पाकिस्तान इस क्षेत्र में एक अनिवार्य राजनयिक और सैन्य खिलाड़ी (Key Player) के रूप में स्थापित हो चुका है।
  • स्टीफन पाउंड (ब्रिटेन के पूर्व सांसद): उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया।

टला एक बड़ा वैश्विक संकट

रक्षा और कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मध्य-पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बड़े वैश्विक युद्ध (तीसरे विश्व युद्ध की आशंका) की ओर इशारा कर रहा था। ऐसे संकट के समय पाकिस्तान के समन्वित नागरिक और सैन्य प्रयासों ने न केवल दुनिया को एक बड़े संभावित युद्ध से बचाया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान की राजनयिक साख और प्रतिष्ठा में भारी इज़ाफा किया है।

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