रामपुर: परीक्षा में कम नंबर आने के डर से घर से भागी बच्ची के लिए ‘देवदूत’ बने डीएम, 6 दिन बाद परिवार से मिलवाया

0
264
Rampur: The District Magistrate became a 'guardian angel' for a girl who ran away from home fearing low marks in her exams.
परीक्षा में कम नंबर आने के डर से घर से भागी बच्ची के लिए 'देवदूत' बने डीएम

रामपुर, उत्तर प्रदेश: परीक्षाओं में कम अंक आने का तनाव और माता-पिता की डांट का डर बच्चों पर कितना गहरा असर डाल सकता है, इसकी एक बानगी रामपुर में देखने को मिली। दिल्ली की रहने वाली एक 13 साल की बच्ची कम नंबर आने के डर से अपना घर छोड़कर रामपुर पहुंच गई। हालांकि, रामपुर के जिलाधिकारी (DM) अजय कुमार द्विवेदी और ‘वन स्टॉप सेंटर’ की सतर्कता से बच्ची को सुरक्षित उसके माता-पिता से मिलवा दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

13 वर्षीय बच्ची दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ती है। परीक्षा में नंबर कम आने के कारण वह मानसिक दबाव में थी। उसे डर था कि स्कूल में साइन करवाने के दौरान माता-पिता उसे डांटेंगे। इसी खौफ में वह 5 तारीख को घर से निकल गई और भटकते हुए रामपुर रेलवे स्टेशन पहुंच गई।

जब बच्ची रेलवे स्टेशन पर संदिग्ध हालत में अकेले घूम रही थी, तो रेलवे स्टाफ ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। इसके बाद ‘वन स्टॉप सेंटर’ ने उसे रेस्क्यू किया।

DM की सूझबूझ और काउंसलिंग आई काम

शुरुआत में बच्ची डरी हुई थी और उसने अपने माता-पिता के बारे में गलत जानकारी दी। उसने यहां तक कहा कि उसके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी है और वह एक मंदिर में रहती थी।

जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के निर्देश पर बच्ची की लगातार चार-पांच दिनों तक काउंसलिंग की गई। जब उसे विश्वास हुआ कि वह सुरक्षित हाथों में है, तब उसने अपने स्कूल का पता बताया। स्कूल के माध्यम से दिल्ली पुलिस और फिर उसके परिजनों से संपर्क साधा गया।

परिजनों ने जताया आभार

6 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद जब बच्ची अपने माता-पिता से मिली, तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बच्ची की मां, नेहा शर्मा ने रामपुर के डीएम को ‘देवदूत’ बताते हुए कहा कि उनके कुशल नेतृत्व और संवेदनशीलता के कारण ही यह चमत्कार संभव हो पाया। उन्होंने वन स्टॉप सेंटर की टीम का भी विशेष धन्यवाद किया।

DM की अपील: बच्चों पर न बनाएं दबाव

इस घटना के बाद डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने अभिभावकों और बच्चों दोनों से अपील की है:

  • अभिभावकों के लिए: पढ़ाई या उपलब्धियों को लेकर बच्चों पर कभी भी ऐसा मानसिक दबाव न बनाएं कि वे गलत कदम उठाने पर मजबूर हो जाएं।
  • बच्चों के लिए: अपने माता-पिता का सम्मान करें और किसी भी समस्या को उनसे साझा करें।

बच्ची अब सुरक्षित अपने घर वापस लौट गई है और उसने वादा किया है कि वह भविष्य में कभी ऐसा कदम नहीं उठाएगी।