गुस्से में नदी में छलांग लगाने पहुंची महिला, रामपुर पुलिस बनी फरिश्ता: मुस्तैदी और सही काउंसलिंग से बचाई जान

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गुस्से में नदी में छलांग लगाने पहुंची महिला, रामपुर पुलिस बनी फरिश्ता: मुस्तैदी और सही काउंसलिंग से बचाई जान

रामपुर: हाल ही में घटी कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं और छात्र-छात्राओं पर हुए पुलिस बल प्रयोग की तस्वीरों ने खाकी वर्दी की छवि पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। आम जनता के मन में पुलिस के कड़े और सख्त रवैये को लेकर गुस्सा और अविश्वास पनपा है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि इसी खाकी के पीछे एक बेहद संवेदनशील और मानवीय दिल भी धड़कता है, जो वक्त पड़ने पर किसी भी हद तक जाकर जिंदगियां बचाता है। ऐसा ही एक दिल छू लेने वाला मामला रामपुर से सामने आया है, जहाँ टांडा थाना पुलिस फरिश्ता बनकर एक महिला की ढाल बन गई।

गश्त के दौरान देवदूत बनी पुलिस

शनिवार को उप-निरीक्षक मनोज कुमार और कांस्टेबल राहुल कुमार चौकी सैदनगर क्षेत्र के लालपुर स्थित कोसी नदी पुल पर शांति व्यवस्था के सिलसिले में गश्त कर रहे थे। तभी पुलिस टीम की नजर पुल के किनारे बेहद आहत और बदहवास खड़ी एक महिला पर पड़ी। इससे पहले कि वह गुस्से में आकर कोसी नदी के तेज बहाव में छलांग लगा पाती, उप-निरीक्षक मनोज कुमार ने अदम्य फुर्ती और सतर्कता दिखाते हुए उसे एन वक्त पर कसकर पकड़ लिया और सुरक्षित नीचे खींच लिया।

घरेलू कलह में उठाया था घातक कदम

पूछताछ में महिला (निवासी ग्राम नरपतनगर, स्वार) ने रोते हुए बताया कि बच्चों की बात को लेकर घर में देवरानी से उसका झगड़ा हो गया था। इस मामूली बात से आहत होकर वह गुस्से में जान देने निकल पड़ी थी। महिला का फुफेरा भाई भी उसे खोजते हुए मौके पर पहुंच गया, जिसने पूरी घटना की पुष्टि की।

मिशन शक्ति केंद्र में मिली सहानभूति और संबल

पुलिस टीम महिला को सिर्फ बचाकर ही नहीं रुकी, बल्कि उसे बेहद आत्मीय माहौल देने के लिए थाना टांडा स्थित ‘मिशन शक्ति केंद्र’ लेकर आई। यहाँ महिला उप-निरीक्षक आराधना तोमर ने एक अभिभावक की तरह उसकी काउंसलिंग की। उसका गुस्सा शांत कराया, जीवन का मूल्य समझाया और फिर सकुशल परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

रामपुर पुलिस की इस संवेदनशीलता और सूझबूझ ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस सिर्फ लाठी या सख्ती का नाम नहीं है—जब बात अपनों की और जान बचाने की आती है, तो यही खाकी रक्षक बनकर सबसे आगे खड़ी मिलती है।