रामपुर(उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश पुलिस का विवादित बयानों और खास समुदाय को निशाना बनाने वाले रवैये से नाता छूटता नजर नहीं आ रहा है। नया मामला रामपुर जिले का है, जहां जिले के पुलिस कप्तान (SP) पद पर तैनात भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने एक समुदाय विशेष को लेकर बेहद अमर्यादित और असंवैधानिक भाषा का इस्तेमाल किया है। वर्दी की मर्यादा तार-तार करने वाले इस अधिकारी के बयान ने संभल के चर्चित और विवादित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी के पुराने रवैये की यादें ताजा कर दी हैं।
प्रेसवार्ता में फिसली एसपी की जुबान, असंवैधानिक भाषा का प्रयोग
रामपुर में सावन महीने के दौरान गोकशी के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस अभियान और एक एनकाउंटर की जानकारी देने के लिए एसपी अनिल कुमार सिंह ने प्रेसवार्ता बुलाई थी। इस दौरान मीडिया के कैमरों के सामने बात करते हुए पुलिस कप्तान अपनी मर्यादा भूल गए।
दारुल उलूम देवबंद के फतवों का हवाला देते-देते एसपी ने एक समुदाय विशेष और आरोपियों के लिए बेहद अपमानजनक और असंवैधानिक शब्द का प्रयोग कर दिया। कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले इतने जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का ऐसा आपत्तिजनक बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और यूपी पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अनुज चौधरी के विवादित रवैये से जुड़ती कड़ियां
यह पहला मौका नहीं है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने किसी समुदाय विशेष को लेकर इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना या आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया हो। रामपुर एसपी का यह बयान संभल में तैनात रहे विवादित क्षेत्राधिकारी (CO) अनुज चौधरी के उन बयानों की याद दिलाता है जो अक्सर सुर्खियों में रहते हैं।
- एकतरफा और आक्रामक भाषा: जिस तरह सीओ अनुज चौधरी अपने बयानों, चेतावनियों और कार्यशैली में एक खास समुदाय के प्रति सख्त और तीखी टिप्पणी करने के लिए जाने जाते हैं, ठीक उसी राह पर अब रामपुर के एसपी भी चलते नजर आ रहे हैं।
- वर्दी के इकबाल पर सवाल: जानकारों का मानना है कि पुलिस अधिकारियों का काम निष्पक्ष रहकर संविधान और कानून के दायरे में कार्रवाई करना है। लेकिन जब एसपी और सीओ रैंक के अधिकारी कैमरे के सामने असंवैधानिक या पक्षपातपूर्ण भाषा बोलते हैं, तो इससे पुलिस की निष्पक्षता पर जनता का विश्वास डगमगाता है।
एनकाउंटर और गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई
मामले की पृष्ठभूमि की बात करें तो रामपुर के इमरता के जंगल में गंज पुलिस ने मुठभेड़ के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसे गोली लगी है। इस घटनाक्रम में एक सिपाही भी घायल हुआ।
एसपी अनिल कुमार सिंह ने बताया कि गिरोह का दूसरा सदस्य दानिश बस्ती जिले से वांछित था। पुलिस अब आरोपियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) के तहत कुर्क करने जा रही है। साथ ही पुराने गोकशों का डोजियर बनाकर पुलिस ऐप पर फीडिंग की जा रही है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश, कार्रवाई का इंतजार
एसपी का विवादित बयान वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों और नागरिक अधिकारों के कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि संविधान की शपथ लेने वाले जिम्मेदार अधिकारी आखिर किसी समुदाय या आरोपी के खिलाफ ऐसी भाषा का प्रयोग कैसे कर सकते हैं? हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक पुलिस विभाग या उच्च अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक सफाई या अनुशासनात्मक कार्रवाई का बयान सामने नहीं आया है।
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