हापुड़: क्षेत्र के जाने-माने नमक व्यापारी, प्रतिष्ठित समाजसेवी और सादगी के प्रतीक हाजी इस्लामुद्दीन कुरैशी का लंबी बीमारी के बाद गुरुवार रात निधन हो गया (इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन)। उनके इंतकाल से शहर और आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई।
हाजी इस्लामुद्दीन जामिया अरबिया खादिमुल इस्लाम हापुड़ के उस्ताद-ए-हदीस मुफ्ती मोहम्मद अय्यूब कासमी व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बदरुद्दीन कुरैशी के बड़े भाई थे। वे मोमिन चैरिटेबल ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य रहे और समाजसेवा में उनका योगदान हमेशा सराहा जाता रहा।
उन्होंने सादगी, सेवा व इंसानियत के सिद्धांतों पर जीवन जिया। पहचान व शोहरत के बावजूद सादा जीवन अपनाया और जरूरतमंदों की मदद को कर्तव्य माना। विशेषकर गरीब बच्चों की शिक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे कई जिंदगियां संवर गईं। परिवार में भी शिक्षा को प्राथमिकता दी—एक भाई दारुल उलूम से मुफ्ती बनकर पश्चिमी यूपी के प्रसिद्ध मदरसे में नायब मोहतमिम हैं, तो दूसरे ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से उच्च शिक्षा ग्रहण कर छात्र नेतृत्व में नाम कमाया।
सामाजिक व कौमी मुद्दों पर सक्रिय रहे हाजी साहब ने ‘मुल्क और मिल्लत बचाओ’ मुहिम में भाग लिया और जेल भी गए। उनका जीवन संघर्ष, सेवा व समर्पण की मिसाल है।
नमाज-ए-जनाजा जमीअत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैयद अरशद मदनी ने पढ़ाई, जिसमें शहर-आसपास से हजारों ने भावभीनी विदाई दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, सचिव प्रदीप नरवाल, जिला अध्यक्ष राकेश त्यागी, पूर्व मंत्री सतीश शर्मा, अमित अग्रवाल समेत कई नेताओं व कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया।
मुफ्ती मोहम्मद अय्यूब कासमी ने मरहूम के लिए दुआ-ए-मगफिरत व परिवार के सब्र की अपील की है।
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