न भूलेंगे, न छोड़ेंगे: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने देशभर में मनाया ‘आक्रोश दिवस’, आतंकवाद के खिलाफ आर-पार की जंग का ऐलान।
नई दिल्ली | 22 अप्रैल, 2026: लिद्दर नदी के किनारे बैसरन घाटी का वह मैदान आज भी 22 अप्रैल 2025 के उस जख्म की गवाही दे रहा है, जिसने देश को झकझोर कर रख दिया था। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर आज पूरा देश न सिर्फ गमगीन है, बल्कि आक्रोशित भी है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने इस दिन को एक जन-आंदोलन का रूप देते हुए देश के कोने-कोने में विरोध प्रदर्शन किए।
इस अवसर पर मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक ‘आतंकिस्तान’ (आतंकवाद का केंद्र) समाप्त नहीं हो जाता, तब तक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी रहेगा।
इंद्रेश कुमार की चेतावनी: अब जवाब ‘निर्णायक’ होगा
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत अब केवल सहने वाला देश नहीं रहा। उन्होंने कहा:
“ऑपरेशन सिंदूर कोई अस्थायी कदम नहीं है, बल्कि यह आतंकवाद की जड़ें खोदने का संकल्प है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने अगर दोबारा सिर उठाया, तो भारत का प्रहार पहले से कहीं ज्यादा घातक होगा। यह पहलगाम के हर पीड़ित के आंसू का हिसाब है।”
पाकिस्तान की नीतियों और PoJK पर बड़ा बयान
इंद्रेश कुमार ने पाकिस्तान को घेरते हुए कहा कि पड़ोसी देश अपनी ही नीतियों के कारण आंतरिक अस्थिरता की आग में जल रहा है। उन्होंने भविष्य की दिशा तय करते हुए दोहराया कि POJK (पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर) एक दिन भारत का अभिन्न अंग बनकर रहेगा।
देश के प्रमुख विचारकों ने भरी हुंकार
पहलगाम हमले की बरसी पर आयोजित विभिन्न सभाओं में कई दिग्गजों ने अपनी बात रखी:
| वक्ता | प्रमुख बिंदु |
| डॉ. शाहिद अख्तर | आतंकवाद समाज के लिए चुनौती है; हर नागरिक को इस लड़ाई में सिपाही बनना होगा। |
| डॉ. शालिनी अली | सेना के साथ देश की महिलाएं भी आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़ी हैं। |
| मोहम्मद अफज़ल | अब केवल वार्ता का समय खत्म हो चुका है, अब केवल सीधी कार्रवाई होगी। |
‘न भूलेंगे, न छोड़ेंगे’: देशभर में फूटा गुस्सा
पहलगाम की बरसी इस बार केवल शोक सभाओं तक सीमित नहीं रही। दिल्ली से लेकर जयपुर और लखनऊ तक सड़कों पर जनसैलाब उतरा।
- पुतला दहन: कई शहरों में आतंकवाद के प्रतीकों और पाकिस्तान विरोधी पुतले जलाए गए।
- जन-आंदोलन: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने रैलियों के जरिए मांग की कि आतंकवाद के खिलाफ सैन्य अभियान और तेज किए जाएं।
- श्रद्धांजलि: बैसरन घाटी में उस स्मारक पर लोगों ने मौन रहकर उन 26 जिंदगियों को याद किया, जो पिछले साल आतंकी कायराना हरकत का शिकार हुए थे।
निर्णायक लड़ाई की शुरुआत
पहलगाम हमले ने देश के भीतर जिस आक्रोश को जन्म दिया था, वह अब एक राष्ट्रीय संकल्प बन चुका है। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के नेतृत्व में उठी यह आवाज साफ कर चुकी है कि जब तक आतंक की आखिरी जड़ खत्म नहीं हो जाती, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ थमेगा नहीं।
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