फिल्म मेकर शुएब चौधरी ने याद किया उनका दयालु स्वभाव
मशहूर फिल्म प्रोड्यूसर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वह पिछले कुछ महीनों से लिवर संबंधी गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। हाल ही में उन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ और 04 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली।
पहलाज निहलानी का जाना बॉलीवुड के एक ऐसे अध्याय का अंत है, जिसने सिनेमा को कई ब्लॉकबस्टर फिल्में और सुपरस्टार्स दिए, लेकिन सेंसर बोर्ड की कुर्सी पर बैठकर वह विवादों के सबसे बड़े केंद्र भी बने।
गॉडफादर बनकर चमकाया कई सितारों का करियर
10 जनवरी 1950 को मुंबई के एक सिंधी परिवार में जन्मे पहलाज निहलानी के बड़े भाई गोविंद निहलानी (नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर, ‘अर्ध सत्य’ और ‘तमस’) जहां गंभीर सिनेमा के लिए जाने गए, वहीं पहलाज ने ‘मसाला एंटरटेनर’ फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर राज किया।
उन्हें बॉलीवुड का बड़ा ‘गॉडफादर’ माना जाता है, जिन्होंने कई नए चेहरों को स्टार बनाया:
- गोविंदा का डेब्यू: 1986 में फिल्म ‘इल्ज़ाम’ से पहलाज ने गोविंदा को मेनस्ट्रीम सिनेमा में बड़ा ब्रेक दिया।
- चंकी पांडे की शुरुआत: 1987 की सुपरहिट फिल्म ‘आग ही आग’ से चंकी पांडे के करियर की शुरुआत हुई।
- दिव्या भारती को पहचान: फिल्म ‘शोला और शबनम’ से उन्होंने दिव्या भारती को हिंदी दर्शकों के बीच सुपरस्टार बनाया।
- ‘आंखें’ का ब्लॉकबस्टर रिकॉर्ड: 1993 में आई फिल्म ‘आंखें’ ने गोविंदा और चंकी पांडे की जोड़ी को इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया।
फिल्म मेकर शुएब चौधरी ने याद किया उनका दयालु स्वभाव
पहलाज निहलानी के निधन पर फिल्म इंडस्ट्री के तमाम लोग उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी बीच जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर शुएब चौधरी ने उनके साथ अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने कहा:
“पच्चीस साल से भी पहले, जब मैं मुंबई आया था, तब मेरा पहला असाइनमेंट पहलाज जी द्वारा प्रोड्यूस किए गए एक टीवी शो में था। वह बेहद विनम्र, शालीन और दयालु इंसान थे, और उनके यही बेहतरीन गुण उनके बेटों में भी साफ झलकते हैं।”
‘संस्कारी’ चेयरमैन और विवादों का नाता: ‘उड़ता पंजाब’ पर 89 कट्स
साल 2015 में जब पहलाज निहलानी को सेंसर बोर्ड (CBFC) का अध्यक्ष बनाया गया, तो उनका कार्यकाल ऐतिहासिक विवादों से घिर गया। उन्हें इंडस्ट्री में ‘संस्कारी’ चेयरमैन कहा जाने लगा।
सबसे बड़ा विवाद: फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ (2016) को लेकर पहलाज निहलानी सीधे फिल्म मेकर्स से भिड़ गए थे। उन्होंने फिल्म से ‘पंजाब’ शब्द हटाने और करीब 89 कट्स लगाने की वकालत कर दी थी, जिसके बाद मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंचा था। इसके अलावा ‘लिपस्टिक अंडर माई बुर्का’ जैसी फिल्मों पर बैन लगाने की कोशिशों के चलते भी उनकी खूब किरकिरी हुई थी।
PM मोदी के ‘जबरा फैन’ थे, फिर क्यों हुए नाराज?
पहलाज निहलानी खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुत बड़ा समर्थक मानते थे। उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ में ‘हर घर मोदी, घर-घर मोदी’ और ‘मेरा देश है महान, मेरा देश है जवान’ जैसे म्यूजिक वीडियोज भी तैयार किए थे।
नाराजगी की वजह: इतनी वफादारी के बावजूद, अगस्त 2017 में उन्हें अचानक और समय से पहले सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटा दिया गया और उनकी जगह प्रसून जोशी को लाया गया। पद से हटाए जाने के बाद पहलाज निहलानी का दर्द छलक पड़ा था। उन्होंने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आरोप लगाया था कि:
- सरकार में बैठे कुछ लोग उनके सख्त रवैये (सेंसरशिप नियमों के पालन) से खुश नहीं थे।
- सूचना और प्रसारण मंत्रालय के कुछ अधिकारी उनके काम में दखल दे रहे थे और उन्हें ‘बलि का बकरा’ बनाया गया।
निहलानी ने तब यह भी कहा था कि वह नियमों के मुताबिक काम कर रहे थे, लेकिन खुद को सच्चा देशभक्त दिखाने के बाद भी उन्हें जिस तरह हटाया गया, उससे वह आहत थे।
अलविदा पहलाज निहलानी: चाहे गोविंदा को ‘चीची’ बनाने का क्रेडिट हो या सेंसर बोर्ड में फिल्मों की कैंची चलाने का विवाद, पहलाज निहलानी को भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा एक ऐसे शख्स के रूप में याद किया जाएगा, जिसने जो किया, अपनी शर्तों पर किया।
- पूर्व सेंसर बोर्ड अध्यक्ष पहलाज निहलानी का निधन: गोविंदा को किया था लॉन्च, पर क्यों हुए विवादों के ‘सुपरहिट’ कैरेक्टर?

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