वेबडेस्क: अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिशों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तीखी धमकियों से नाराज होकर ईरान ने स्विट्जरलैंड में चल रही ‘ज्यूरिख वार्ता’ (Zurich Talks) को बीच में ही छोड़ दिया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है और उसकी सेना हर हमले का करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इस कदम के बाद दोनों देशों के बीच जारी शांति वार्ता पर पूरी तरह से ग्रहण लगता नजर आ रहा है।
80 मिनट की चर्चा के बाद वॉशआउट हुई बातचीत
‘अलजजीरा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत शुरू हुई थी। करीब 80 मिनट तक चली इस चर्चा में दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से तेहरान और वॉशिंगटन के बीच हुए MoU (समझौता ज्ञापन) को लागू करने और लेबनान के मौजूदा हालातों पर ध्यान केंद्रित किया गया था। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, इस बैठक में परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
बड़ी बात: ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ ने पुष्टि की है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े बयानों और धमकियों से नाराज होकर ईरान का डेलीगेशन वार्ता स्थल छोड़कर चला गया, जिसके बाद बातचीत को कुछ समय के लिए रोक दिया गया है।
ट्रंप ने क्या दी थी धमकी?
दरअसल, इस बेहद संवेदनशील वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी दे दी थी। ट्रंप ने कहा था:
- ईरान को लेबनान में सक्रिय अपने प्रॉक्सी (विशेषकर हिज्बुल्लाह) को मुश्किलें खड़ी करने से तुरंत रोकना होगा।
- तेहरान को लेबनान में भारी-भरकम फंड पाने वाले अपने गुटों की रुकावटों पर लगाम लगानी होगी।
- ट्रंप की चेतावनी: “अगर ईरान ने ऐसा नहीं किया, तो हम उस पर जोरदार हमला करेंगे। यह हमला ठीक वैसा ही होगा जैसा हमने पिछले हफ्ते किया था, बल्कि उससे भी कहीं ज्यादा खतरनाक होगा।”
‘हमारी सेना तैयार’… ईरान का पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप की इस सीधी सैन्य धमकी पर ईरान ने भी बेहद सख्त रुख अपनाया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने अमेरिकी धमकियों को सिरे से खारिज करते हुए तेहरान का रुख साफ किया।
गालिबाफ ने चेताया कि:
- अमेरिका को ईरान के खिलाफ इस तरह के बयान देने से पहले सावधान रहना चाहिए।
- ईरान की सेना किसी भी अमेरिकी दुस्साहस या हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हर वक्त मुस्तैद और तैयार है।
आगे क्या?
पाकिस्तान और कतर जैसी वैश्विक ताकतों की मध्यस्थता के बावजूद, ट्रंप के आक्रामक तेवर और ईरान के कड़े पलटवार ने मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। अब देखना होगा कि क्या यह ज्यूरिख वार्ता पूरी तरह से रद्द होती है या पर्दे के पीछे से इसे दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश की जाएगी।
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