फिर बढ़ीं आज़म खान की मुश्किलें: जौहर ट्रस्ट को आयकर विभाग का नोटिस, सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप

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लखनऊ/रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आज़म खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को आयकर विभाग (Income Tax Department) ने एक नया कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। यह नोटिस ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के सरकारी फंड और उसके कथित दुरुपयोग के मामले में दिया गया है।

शिकायतकर्ता का दावा: सरकारी पैसे का हुआ निजी इस्तेमाल

इस मामले में शिकायतकर्ता और भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया है कि आज़म खान के इस पारिवारिक ट्रस्ट को तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों रुपये का सरकारी अनुदान (Government Funds) दिया गया था।

आकाश सक्सेना के मुताबिक, “जौहर ट्रस्ट एक निजी और पारिवारिक ट्रस्ट है, जिसमें आज़म खान, उनकी पत्नी तज़ीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आज़म मुख्य पदों पर हैं। नियमों के अनुसार, किसी भी निजी ट्रस्ट को विकास कार्यों के लिए सीधे सरकारी बजट आवंटित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, आज़म खान ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर लोक निर्माण विभाग (PWD) और अन्य सरकारी विभागों के जरिए करोड़ों रुपये की राशि ट्रस्ट के अंतर्गत आने वाली मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में लगवाई।”

आयकर विभाग की जांच के दायरे में ट्रस्ट

शिकायतकर्ता द्वारा सौंपे गए दस्तावेजी सबूतों के आधार पर आयकर विभाग की विंग ने इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। विभाग ने जौहर ट्रस्ट से पूछा है कि सरकारी खजाने से मिली इस भारी-भरकम राशि को ट्रस्ट के खातों में किस आधार पर दिखाया गया और इसका टैक्स असेसमेंट क्यों नहीं किया गया। ट्रस्ट को इस नोटिस का जवाब देने के लिए समय सीमा दी गई है।

पहले भी रद्द हो चुकी है टैक्स छूट

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब जौहर ट्रस्ट आयकर विभाग के रडार पर आया है। इससे पहले भी नियमों के उल्लंघन और ट्रस्ट की गतिविधियों में पारदर्शिता न होने के कारण आयकर विभाग ने जौहर ट्रस्ट को मिलने वाली टैक्स छूट (Section 12A के तहत मिलने वाली छूट) को रद्द कर दिया था।

राजनीतिक गलियारों में हलचल

रामपुर की राजनीति और यूपी के सियासी हलकों में इस नए नोटिस के बाद एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। जहां एक तरफ भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बता रही है, वहीं आज़म खान के समर्थकों का आरोप है कि राजनीतिक द्वेष के चलते उनके शैक्षणिक संस्थानों और ट्रस्ट को निशाना बनाया जा रहा है। फिलहाल, आयकर विभाग की इस कार्रवाई पर आज़म खान या उनके कानूनी सलाहकारों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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