बदायूं (उत्तर प्रदेश): चर्चित मुकदमे (अपराध संख्या 129/2022) में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका लगा है। माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-6/स्पेशल जज (गैंगस्टर), बदायूं की अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज करते हुए निचली कोर्ट (सिविल जज सीनियर डिवीजन/MP-MLA कोर्ट) के फैसले को बरकरार रखा है।
अदालत के इस फैसले से सपा विधायकों और पदाधिकारियों सहित सभी आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है।
तत्कालीन SDM ने दर्ज कराया था मुकदमा
मामला वर्ष 2022 का है। तत्कालीन उपजिलाधिकारी (SDM) ज्योति शर्मा की तहरीर पर थाना सिविल लाइन्स में सपा के प्रमुख नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
नामजद आरोपी:
- आशीष यादव (सपा जिलाध्यक्ष)
- हिमांशु यादव (विधायक)
- आशुतोष मौर्य (विधायक)
- काजी रिजवान
- कैप्टन अर्जुन सिंह
- रचित गुप्ता
पुलिस ने सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 188, 341, 352, 353 और 504 के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
निचली अदालत से सत्र न्यायालय तक का सफर
प्रकरण की सुनवाई MP-MLA कोर्ट बदायूं में हुई थी। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर सभी छह आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश सुनाया था।
निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी।
अदालत में दमदार कानूनी तर्क
सत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रोशन यासीन उर्फ गुड्डू ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष प्रभावी कानूनी दलीलें और साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए राज्य सरकार की अपील को बेबुनियाद बताया।
माननीय ADJ-6/स्पेशल जज (गैंगस्टर) ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सरकार की अपील निरस्त कर दी और निचली अदालत के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा।
कानून की जीत: अदालत के निर्णय के बाद स्थानीय अधिवक्ताओं और शुभचिंतकों ने वरिष्ठ अधिवक्ता रोशन यासीन उर्फ गुड्डू की सफल पैरवी की सराहना की। समर्थकों ने इसे तथ्यों, निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और कानून की बड़ी जीत करार दिया।
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