मुरादाबाद: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के समावेशी और ऐतिहासिक बयान की देश भर में सराहना हो रही है। संघ प्रमुख ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होने चाहिए, तो वह हिंदू नहीं है।” उनके इस बयान को भारत की समृद्ध संस्कृति, विविधता और सामाजिक सद्भाव के प्रति एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के राष्ट्रीय संयोजक मज़ाहिर ख़ान ने संघ प्रमुख के इस वक्तव्य का पुरजोर स्वागत और समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह संदेश भारतीयता की मूल आत्मा को उजागर करता है और देश की सदियों पुरानी ‘साझा विरासत’ को मजबूती प्रदान करता है।
‘भारतीयता और साझा विरासत का जीवंत प्रतीक’ — मज़ाहिर ख़ान
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मज़ाहिर ख़ान ने इस बयान को सामाजिक समरसता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा:
“संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत जी का यह विचार भारत की मूल भावना और हमारी बहुसांस्कृतिक विरासत का सबसे सटीक चित्रण है। भारत का निर्माण किसी एक समुदाय से नहीं, बल्कि यहाँ रहने वाले हर नागरिक के योगदान से हुआ है। जो लोग नफ़रत या विभाजन की राजनीति करते हैं, संघ प्रमुख के इस बयान ने उन्हें करारा जवाब दिया है।”
मज़ाहिर ख़ान ने आगे कहा कि भारत के सभी नागरिकों का इतिहास, संस्कृति और पूर्वज एक ही हैं। विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है और संघ प्रमुख की यह सोच देश में आपसी विश्वास और भाईचारे को एक नए शिखर पर ले जाएगी।
संघ प्रमुख के बयान के प्रमुख बिंदु:
- सच्चे हिंदुत्व की पहचान: संघ प्रमुख ने साफ किया कि हिंदुत्व सह-अस्तित्व और सर्वधर्म सद्भाव सिखाता है। नफ़रत या किसी समुदाय के बहिष्कार की भावना हिंदुत्व के सिद्धांतों के सर्वथा विपरीत है।
- समान डीएनए और साझा इतिहास: भारतीय समाज की जड़ों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए और पूर्वज समान हैं। पूजा पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक पहचान एक ही है।
- विभाजनकारी ताकतों पर प्रहार: यह संदेश उन असामाजिक और कट्टरपंथी तत्वों को कड़ा जवाब है जो धर्म के नाम पर समाज को बांटने और विद्वेष फैलाने की कोशिश करते हैं।
देशभर में सकारात्मक संदेश
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों और बुद्धिजीवियों ने भी इस बयान का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि संघ प्रमुख का यह रुख देश में धार्मिक सौहार्द, शांति और राष्ट्रीय अखंडता को मजबूत करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।
मज़ाहिर ख़ान ने अंत में कहा कि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच हमेशा से राष्ट्र-प्रथम (Nation First) की भावना के साथ काम करता आया है और संघ प्रमुख के इस दृष्टिकोण को जन-जन तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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