प्रशांत भूषण का न्यायपालिका पर तीखा प्रहार: भ्रष्टाचार, जवाबदेही की कमी और स्वतंत्रता पर खतरा?

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नई दिल्ली: दिल्ली के जामिया नगर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने न्यायपालिका की जवाबदेहीजजों के भ्रष्टाचार और स्वतंत्रता पर संकट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि इंपीचमेंट प्रक्रिया जटिल होने से जजों की कोई प्रभावी जवाबदेही नहीं बची, जिससे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भ्रष्टाचार बढ़ गया। मोदी सरकार के दौर में जजों की नियुक्ति और रिटायरमेंट के बाद पद स्वतंत्रता को कमजोर कर रहे हैं।

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी क्यों?

प्रशांत भूषण ने जस्टिस रामास्वामी मामले का जिक्र कर बताया कि जांच समिति ने दोषी ठहराया, लेकिन लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत न मिलने से इंपीचमेंट फेल हो गया। वीरास्वामी केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि जजों की जांच के लिए चीफ जस्टिस की अनुमति जरूरी है। हालिया यशवंत वर्मा मामले में घर से भारी नकदी मिली, लेकिन FIR तक नहीं दर्ज हुई। इन-हाउस प्रक्रिया और कोड ऑफ कंडक्ट भी अप्रभावी हैं, क्योंकि शिकायतें कूड़ेदान में फेंक दी जाती हैं।

जजों का राजनीतिकरण और कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन

प्रशांत भूषण ने सीजेआई के योगी आदित्यनाथ के साथ नए डिस्ट्रिक्ट कोर्ट्स उद्घाटन और पूजा में शामिल होने की आलोचना की। 1997 के जस्टिस वर्मा के कोड ऑफ कंडक्ट में साफ है कि जजों को पॉलिटिशियंस से दूरी रखनी चाहिए। आयरलैंड के जजों ने भी भारत में जजों का पॉलिटिशियंस से हाथ मिलाने का मजाक उड़ाया। RTI में सुप्रीम कोर्ट ने जज शिकायतों पर जानकारी छिपाई।

मोदी काल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला

रिटायरमेंट के बाद जजों को लोकपाल, राज्यपाल, राज्यसभा जैसे पद देकर प्रभावित किया जा रहा। अरुण जेटली ने कहा था कि पोस्ट-रिटायरमेंट जॉब्स फैसलों को प्रभावित करते हैं। कोलेजियम सिस्टम कमजोर: सरकार योग्य जजों जैसे अखिल कुरैशी की नियुक्ति रोकती है। CBI, ED, IB जैसी एजेंसियां जजों पर जासूसी कर ब्लैकमेल करती हैं। उमर खालिद, EVM जैसे फैसलों में सरकार समर्थन दिखा।

समस्याउदाहरणप्रभाव
जवाबदेही की कमीइंपिचमेंट फेल, इन-हाउस नाकामभ्रष्टाचार बढ़ा
राजनीतिक दबावपोस्ट-रिटायरमेंट जॉब्सस्वतंत्र फैसले कम
नियुक्ति में देरीअखिल कुरैशी केसइंडिपेंडेंट जज कम
कंटेंप्ट खतराभूषण पर केसआलोचना दबाव

सुधार के प्रमुख सुझाव: ज्यूडिशियल कमीशन जरूरी

प्रशांत भूषण ने इंडिपेंडेंट ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी कमीशन और अपॉइंटमेंट कमीशन बनाने की मांग की। कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट एक्ट में बदलाव: स्कैंडलाइजिंग कोर्ट प्रावधान हटे। कोर्ट लाइव स्ट्रीमिंग बढ़े, सील्ड कवर बंद हो (राफेल, जज लोया केस उदाहरण)। जन आंदोलन से ही रिफॉर्म संभव, क्योंकि सरकार-ज्यूडिशरी सुधार नहीं चाहते। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने ज्यूडिशरी को तीसरा सबसे भ्रष्ट संस्थान माना।

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